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Friday, 27 October 2023

शरद् पूर्णिमा की खीर और चंद्र ग्रहण

 *शरद् पूर्णिमा की खीर  और चंद्र ग्रहण*


*ग्रहण का सूतक काल , खीर बनाने का समय ...व  शरद् पूर्णिमा की खीर का महत्व ......*


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*कब है शरद् पूर्णिमा 2023…* 


शरद् पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 28 अक्टूबर, शनिवार, प्रात: 04:17 बजे से…

शरद् पूर्णिमा तिथि का समापन: 29 अक्टूबर, रविवार, 01:53  पर…

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 *कब है चंद्र ग्रहण 2023…!?* 


साल का अंतिम चंद्र ग्रहण प्रारंभ समय: 28 अक्टूबर, देर रात 01:06 बजे‌… 

चंद्र ग्रहण समापन समय: 28 अक्टूबर, मध्य रात्रि 02:22 बजे

सूतक काल का समय: 28 अक्टूबर, दोपहर 02:52 बजे से लेकर मध्य रात्रि 02:22 बजे तक…


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*चंद्र ग्रहण के समय न रखें शरद पूर्णिमा की खीर, इस गलती से बचें…* 


28 अक्टूबर को शरद् पूर्णिमा है और उस दिन चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर से प्रारंभ है. यदि आप इस दिन खीर बनाकर रखते हैं तो वह दूषित हो जाएगा. सूतक काल के पूर्व आप खीर बना लेते हैं तो भी वह ग्रहण से दूषित होगा. उसे आप ग्रहण के बाद चंद्रमा की रोशनी में रखकर नहीं खा सकते हैं. दूषित खीर आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.


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 *शरद् पूर्णिमा 2023 खीर रखने का सही समय…* 


आप शरद पूर्णिमा की खीर चतुर्दशी की रात यानि 27 अक्टूबर शुक्रवार की रात बना लें. फिर 28 अक्टूबर को जब शरद पूर्णिमा की तिथि प्रात: 04:17 बजे से शुरू हो तो उस समय उस खीर को चंद्रमा की रोशनी में रख दें. उस दिन चंद्रास्त लगभग प्रात: 04:42 पर होगा. .चंद्रास्त के बाद उस खीर को खा सकते हैं. 28 अक्टूबर के प्रात: पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा की औषधियुक्त रोशनी प्राप्त हो जाएगी.


दूसरा विकल्प यह है कि आप 28 अक्टूबर के मध्य रात्रि चंद्र ग्रहण के बाद खीर बनाएं और उसे खुले आसमान के नीचे रख दें ताकि उसमें चंद्रमा की रोशनी पड़े. बाद में उस खीर को खा सकते हैं.


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*शरद पूर्णिमा की खीर का महत्व…* 


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होकर आलोकित होता है. इस वजह से उसकी किरणों में अमृत के समान औषधीय गुण होते हैं. जब हम शरद पूर्णिमा की रात खीर को खुले आसमान के नीचे रखते हैं तो उसमें चंद्रमा की किरणें पड़ती हैं, जिससे वह खीर औषधीय गुणों वाला हो जाता है. खीर की सामग्री में दूध, चावल  चंद्रमा से जुड़ी हुई वस्तुएं हैं, इसके सेवन से मौसम में हुई तब्दीली से शरीर में होने वाले शीतकालीन प्रभाव मलेरिया बुखार, इत्यादि से स्वास्थ्य लाभ तो होता ही है, साथ ही कुंडली का चंद्र दोष निवारण भी होता है. 

अधिक जानकारी के लिए ब अपनी जन्मकुंडली बनवाने ब दिखाने के लिए ओर अपने उपाय परहेज़ जानने के लिए मिलें...


*राम राम जी*


           *Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone number 9417311379 www.astropawankv.com*

Thursday, 26 October 2023

चंद्र ग्रहण....उपाय परहेज़

 *⚫ चंद्र - ग्रहण ⚫* 

*28 अक्टूबर 2023 शनिवार*


*चंद्र ग्रहण काल में उपाय परहेज़*


चंद्रग्रहण सिर्फ और सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण घटना है। साल का अंतिम चंद्रग्रहण शरद पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है ऐसे में इस दिन ग्रहण लगना बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण मेष राशि में लगने जा रहा है। ग्रहण का असर सभी राशियों पर दिखाई देने वाला है।


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*▪️चंद्र-ग्रहण सूतक काल का समय-:* 

चंद्रग्रहण 28 अक्टूबर 2023, शनिवार देर रात 1 बजकर 5 मिनट से लेकर 2 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। यानी यह ग्रहण 1 घंटा 18 मिनट का रहेगा। इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा।


*▪️चंद्र ग्रहण का समय-:* 

चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण के 9 घंटे पूर्व से शुरु हो जाता है अतः भारतीय समय अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक शाम में 4 बजकर 5 मिनट पर आरंभ हो जाएगा। इस ग्रहण में चंद्रबिम्ब दक्षिण की तरफ से ग्रस्त होगा।


*▪️देश और दुनिया में कहां- कहां दिखाई देगा ग्रहण-:* 

चंद्रग्रहण भारत, ऑस्ट्रेलिया, संपूर्ण एशिया, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिणी-पूर्वी अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, कैनेडा, ब्राजील , एटलांटिक महासागर में यह ग्रहण दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण शुरुआत से अंत तक दिखाई देगा।


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*▪️सूतक काल में न करें ये काम-:* 


चंद्रग्रहण का सूतक शाम में 4 बजकर 5 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान आपको किसी प्रकार का मांगलिक कार्य,  हवन और भगवान की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस समय आप सभी अपने अपने गुरु मंत्र, भगवान जी का नाम जप, श्रीहनुमान चालीसा कर सकते हैं।


 चंद्र ग्रहण- सूतक काल के दौरान भोजन बनाना व भोजन करना भी उचित नहीं है। हालांकि, सूतक काल में गर्भवती स्त्री, बच्चे, वृद्ध जन  बीमार जन को आवश्यक हो तो वो भोजन कर सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें दोष नहीं लगेगा। ध्यान रखें की सूतक काल आरंभ होने से पहले खाने पीने की चीजों में तुलसी के दो - दो पत्ते डाल दें। इसके अलावा आप इसमें कुशा भी डाल सकते हैं।

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*▪️चंद्र ग्रहण पुण्य काल में उपाय परहेज़-:*

 चंद्र, ग्रहण से मुक्त होने के बाद स्नान- दान- पुण्य- पूजा उपासना इत्यादि का विशेष महत्व है। अतः 29 अक्टूबर, सुबह स्नान के बाद भगवान की पूजा उपासना, दान पुण्य करें। ऐसा करने से चंद्र ग्रहण के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। और अपनी अपनी जन्मकुंडली के ग्रह, राशि, नक्षत्रों के अनुसार जो भी उपाय परहेज़ हों उन्हें अवश्य करें और चन्द्र ग्रह के दोष निवारण के उपाय परहेज़ जन्मकुंडली ब वर्ष कुंडली के अनुसार जो भी हो उन्हें ग्रहण काल के बाद अवश्य करें।


           *Research Astrologers Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.)& Monita Verma Astro Vastu.....Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone number..9417311379. www.astropawankv.com*

Tuesday, 24 October 2023

विजया दशमी... दशहरा





_अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय,पाप पर पुण्य की विजय, अत्याचार पर सदाचार की विजय,क्रोध पर दया - क्षमा की विजय,अज्ञान पर ज्ञान की विजय, रावण पर श्रीराम की विजय के प्रतीक पावन पर्व_   _दशहरा -_ _विजयादशमी की आपको और आपके परिवार को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं...._

                           🙏

 विजया दशमी 

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दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार आज 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा।दशहरे के दिन ही भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी।इसी दिन देवी मां की प्रतिमा विसर्जन भी होता है। इस दिन अस्त्र शस्त्रों की पूजा की जाती है और विजय पर्व मनाया जाता है।


कैसे मनाएं दशहरा? 

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इस दिन सबसे पहले देवी और फिर भगवान राम की पूजा करें। पूजा के बाद देवी और प्रभु राम के मंत्रों का जाप करें। अगर कलश की स्थापना की है तो नारियल हटा लें। उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।कलश का जल पूरे घर में छिड़कें। ताकि घर की नकारात्मकता समाप्त हो जाए। जिस जगह आपने नवरात्रि मे पूजा की है, उस स्थान पर रात भर दीपक जलाएं। अगर आप शस्त्र पूजा करना चाहते हैं तो उस पर तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधें।


तिथि और मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 23 अक्टूबर शाम 5 बजकर 44 मिनट से 24 अक्टूबर दोपहर 3 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के चलते 24 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा।  फिर दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। पूजा के लिए ये दोनों ही मुहूर्त शुभ हैं।


   || विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं ||

                 

Thursday, 5 October 2023

पितरों को भोजन कैसे मिलता है...

 || पितरों को भोजन कैसे मिलता है ?||

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प्राय: कुछ लोग यह शंका करते हैं कि श्राद्ध में समर्पित

     की गईं वस्तुएं पितरों को कैसे मिलती है? 


कर्मों की भिन्नता के कारण मरने के बाद गतियां भी भिन्न- भिन्न होती हैं। कोई देवता, कोई पितर, कोई प्रेत, कोई हाथी, कोई चींटी, कोई वृक्ष और कोई तृण बन जाता है। तब मन में यह शंका होती है कि छोटे से पिंड से या ब्राह्मण को भोजन करने से अलग-अलग योनियों में पितरों को तृप्ति कैसे मिलती है?


इस शंका का स्कंद पुराण में बहुत

         सुन्दर समाधान मिलता है

 

एक बार राजा करंधम ने महायोगी महाकाल से पूछा, मनुष्यों द्वारा पितरों के लिए जो तर्पण या पिंडदान किया जाता है तो वह जल, पिंड आदि तो यहीं रह जाता है फिर पितरों के पास वे वस्तुएं कैसे पहुंचती हैं और कैसे पितरों को तृप्ति होती है?'

 

भगवान महाकाल ने बताया कि विश्व नियंता ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि श्राद्ध की सामग्री उनके अनुरूप होकर पितरों के पास पहुंचती है। इस व्यवस्था के अधिपति हैं अग्निष्वात आदि। पितरों और देवताओं की योनि ऐसी है कि वे दूर से कही हुई बातें सुन लेते हैं, दूर की पूजा ग्रहण कर लेते हैं और दूर से कही गईं स्तुतियों से ही प्रसन्न हो जाते हैं।


वे भूत, भविष्य व वर्तमान सब जानते हैं और सभी जगह पहुंच सकते हैं। 5 तन्मात्राएं, मन, बुद्धि, अहंकार और प्रकृति-इन 9 तत्वों से उनका शरीर बना होता है और इसके भीतर 10वें तत्व के रूप में साक्षात भगवान पुरुषोत्तम उसमें निवास करते हैं इसलिए देवता और पितर गंध व रसतत्व से तृप्त होते हैं। शब्द तत्व से तृप्त रहते हैं और स्पर्श तत्व को ग्रहण करते हैं। पवित्रता से ही वे प्रसन्न होते हैं और वे वर देते हैं।

 

पितरों का आहार है अन्न-जल का सारतत्व- जैसे मनुष्यों का आहार अन्न है, पशुओं का आहार तृण है, वैसे ही पितरों का आहार अन्न का सारतत्व (गंध और रस) है। अत: वे अन्न व जल का सारतत्व ही ग्रहण करते हैं। शेष जो स्थूल वस्तु है, वह यहीं रह जाती है।

 

किस रूप में पहुंचता है पितरों को आहार?

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नाम व गोत्र के उच्चारण के साथ जो अन्न-जल आदि पितरों को दिया जाता है, विश्वदेव एवं अग्निष्वात (दिव्य पितर) हव्य-कव्य को पितरों तक पहुंचा देते हैं। 


यदि पितर देव योनि को प्राप्त हुए हैं तो यहां

    दिया गया अन्न उन्हें 'अमृत' होकर प्राप्त होता है। 


यदि गंधर्व बन गए हैं, तो वह अन्न 

    उन्हें भोगों के रूप में प्राप्त होता है। 


यदि पशु योनि में हैं, तो वह अन्न 

        तृण के रूप में प्राप्त होता है। 


नाग योनि में वायु रूप से, 


यक्ष योनि में पान रूप से, 


राक्षस योनि में आमिष रूप में, 


दानव योनि में मांस रूप में, 


प्रेत योनि में रुधिर रूप में 


और मनुष्य बन जाने पर भोगने योग्य

     तृप्तिकारक पदार्थों के रूप में प्राप्त होता है।

 

जिस प्रकार बछड़ा झुंड में अपनी मां को ढूंढ ही लेता है, उसी प्रकार नाम, गोत्र, हृदय की भक्ति एवं देश-काल आदि के सहारे दिए गए पदार्थों को मंत्र पितरों के पास पहुंचा देते हैं।जीव चाहें सैकड़ों योनियों को भी पार क्यों न कर गया हो, तृप्ति तो उसके पास पहुंच ही जाती है।

 

श्राद्ध में आमंत्रित ब्राह्मण पितरों के प्रतिनिधि रूप होते हैं। एक बार पुष्कर में श्रीरामजी अपने पिता दशरथजी का श्राद्ध कर रहे थे। रामजी जब ब्राह्मणों को भोजन कराने लगे तो सीताजी वृक्ष की ओट में खड़ी हो गईं ब्राह्मण भोजन के बाद रामजी ने जब सीताजी से इसका कारण पूछा तो वे बोलीं-

 

मैंने जो आश्चर्य देखा, उसे मैं आपको बताती हूं। आपने जब नाम-गोत्र का उच्चारण कर अपने पिता-दादा आदि का आवाहन किया तो वे यहां ब्राह्मणों के शरीर में छाया रूप में सटकर उपस्थित थे। ब्राह्मणों के शरीर में मुझे अपने श्वसुर आदि पितृगण दिखाई दिए फिर भला मैं मर्यादा का उल्लंघन कर वहां कैसे खड़ी रहती? इसलिए मैं ओट में हो गई।'

 

तुलसी से पिंडार्चन किए जाने पर पितरगण प्रलयपर्यंत तृप्त रहते हैं। तुलसी की गंध से प्रसन्न होकर गरुड़ पर आरूढ़ होकर विष्णुलोक चले जाते हैं।

 

पितर प्रसन्न तो सभी देवता प्रसन्न- श्राद्ध से बढ़कर और कोई कल्याणकारी कार्य नहीं है और वंशवृद्धि के लिए पितरों की आराधना ही एकमात्र उपाय है।

 

आयु: पुत्रान् यश: स्वर्ग कीर्तिं पुष्टिं बलं श्रियम्।

   पशुन् सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृपूजनात्।।*

             (यमस्मृति, श्राद्धप्रकाश)

 

यमराजजी का कहना है कि श्राद्ध करने 

       से मिलते हैं ये 6 पवित्र लाभ-

 

 श्राद्ध कर्म से मनुष्य की आयु बढ़ती है।


पितरगण मनुष्य को पुत्र प्रदान कर

        वंश का विस्तार करते हैं।


परिवार में धन-धान्य का अंबार लगा देते हैं।


श्राद्ध कर्म मनुष्य के शरीर में बल-पौरुष

   की वृद्धि करता है और यश व पुष्टि प्रदान करता है।


पितरगण स्वास्थ्य, बल, श्रेय, धन-धान्य

    आदि सभी सुख, स्वर्ग व मोक्ष प्रदान करते हैं।


श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने वाले के परिवार में कोई क्लेश

  नहीं रहता, वरन वह समस्त जगत को तृप्त कर देता है।


     || सर्व पितरों को नमन और प्रणाम ||

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