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Thursday, 31 October 2024

दीवाली पर्व...

 आप सभी जन को Astropawankv की पूरी Team की तरफ़ से दीवाली दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं



Tuesday, 29 October 2024

धनतेरस पर्व उपाय





 *धनतेरस पर्व*


धनतेरस की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन धन और स्वास्थ्य की देवी लक्ष्मी जी और धन्वंतरि जी की पूजा की जाती है। यहां धनतेरस की पूजा विधि और कुछ खास उपाय दिए गए हैं:


धनतेरस की पूजा विधि


1. साफ-सफाई: घर की साफ-सफाई करें, विशेषकर उस स्थान को जहां पूजा करनी है।



2. कलश स्थापना: पूजा स्थल पर एक साफ स्थान पर कलश स्थापित करें और उसमें गंगाजल, अक्षत (चावल), सुपारी और कुछ सिक्के डालें।



3. मिट्टी या धातु का दीपक: एक नया दीपक खरीदें और इसे पूजा के समय जलाएं। इसे घर के मुख्य द्वार पर रखें।



4. धनतेरस के दिन दीप दान: धनतेरस की शाम को मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है।



5. लक्ष्मी-गणेश की पूजा: लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें। उन्हें पुष्प, फल, मिठाई, चावल, हल्दी और सिंदूर अर्पित करें।



6. धन्वंतरि भगवान की पूजा: धनतेरस का दिन भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन भी माना जाता है। इसलिए उनकी प्रतिमा या चित्र की पूजा करें और उन्हें दीप, पुष्प, फल आदि अर्पित करें।



7. धनतेरस मंत्र का जाप: लक्ष्मी और धन्वंतरि से संबंधित मंत्रों का जाप करें जैसे "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः" और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्वरोग निवारणाय त्रिलोक पथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूपाय श्री धन्वंतरि स्वरूपाय नमः।"




धनतेरस के विशेष उपाय


1. धातु खरीदें: इस दिन सोना, चांदी, बर्तन या धातु की कोई वस्तु खरीदना शुभ होता है, इससे आर्थिक समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।



2. धनिया के बीज: पूजा में धनिया के बीज अर्पित करें और बाद में इन्हें अपने घर में किसी पवित्र स्थान पर रखें, यह परिवार में धन-संपदा को बनाए रखने में सहायक है।



3. सिंदूर का दान: विवाहित महिलाओं को सिंदूर का दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।



4. दीपदान: धनतेरस की रात को घर के हर कमरे में एक दीपक जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।



5. झाड़ू खरीदें: मान्यता है कि धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना आर्थिक समृद्धि के लिए शुभ होता है।



6. गरीबों की मदद: धनतेरस पर गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।




इन विधियों और उपायों का पालन करने से धनतेरस के दिन आपको देवी लक्ष्मी की कृपा और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

और साथ में यम महाराज के लिए एक दीपक दक्षिण दिशा में एक मुखी या चार मुखी साथ में पितरों के नाम से पांच दीपक लगाए वह भी दक्षिण दिशा में  और पितरों के लिए समर्पित हो उनका आशीर्वाद प्राप्त हो ऐसा संकल्प ले साथ में घर के प्रत्येक कमरों में एक-एक दीपक लगाए यह दिवाली तक लगाना है जिस से घर की नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाए ...,............

जय माताजी हर हर महादेव जय पित्र देव जय लक्ष्मी कुबेर जय धन्वंतरि महाराज की जय हो

🙏🙏

*Scientific Astrology and Vastu...*

*Research Astrologers Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.) & Monita Verma Astro Vastu.... Astro Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone 9417311379  www.astropawankv.com*

Friday, 11 October 2024

नवरात्रि पर्व का नवम दिवस

  नवरात्रि पर्व का नवम दिवस...मां सिद्धिदात्री


 आज नवरात्र के आखिरी दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के नौवें रूप मां सिद्धिदात्री का पूजन, अर्चन और स्तवन किया जाता है। 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। अपने उपासक को ये सभी सिद्धियां देने के कारण ही इन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है।


*🔸नवरात्र का अंतिम दिन है विशेष-:* 

* नवरात्र के प्रमुख आकर्षण में से एक कन्या-पूजन भी है। ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की उपासना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं, उनका नवरात्र व्रत नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजने के बाद ही पूरा होता है। उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार भोग लगाकर दक्षिणा देने से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं। इसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए। शक्ति पूजन का अंतिम दिन होने से ये दिन काफी विशेष होता है/


*🔸ऐसे करें कन्या पूजन-:*


* कन्याओं को माता रानी का रूप माना जाता है। कन्याओं के घर आने पर माता रानी के जयकारे भी लगाने चाहिए। इसके बाद कन्याओं के पैर धोने चाहिए। सभी कन्याओं को आसन बिछाकर बैठाना चाहिए, फिर रोली और कुमकुम का टीका लगाने के बाद उनके हाथ में मौली बांधनी चाहिए। अब सभी कन्याओं और बालक की आरती उतारनी चाहिए। इसके बाद माता रानी को भोग लगाया हुआ भोजन कन्याओं को दें/


*🔸देवी का भोग प्रसाद-:* 


* मां भगवती को खीर, मिठाई, फल, हलवा, चना, मालपुआ प्रिय है इसलिए कन्या पूजन के दिन कन्याओं को खाने के लिए पूरी, चना और हलवा दिया जाता है। कन्याओं को केसर युक्त खीर, हलवा, पूड़ी खिलाना चाहिए। कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराना चाहिए। बालक को बटुक भैरव और लंगूरा के रूप में पूजा जाता है। देवी की सेवा के लिए भगवान शिव ने हर शक्तिपीठ के साथ एक-एक भैरव को रखा हुआ है, इसलिए देवी के साथ इनकी पूजा भी जरूरी है/


*🔸ऐसा है मां का स्वरूप-:* 


* मां दुर्गा इस रूप में श्वेत वस्त्र धारण की है। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं से युक्त हैं। इनका वाहन सिंह है। यह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प है।


*🔸मां सिद्धिदात्री की स्तुति-:* 


"या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।"


*🔸मां सिद्धिदात्री की प्रार्थना-:* 


"सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।"


*🔸मां सिद्धिदात्री के मंत्र-:* 

       "ऊं देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।।"


               *जय माता दी* 

Thursday, 10 October 2024

नवरात्रि महोत्सव का आठवां दिन

 नवरात्रि महोत्सव का आठवां दिन और मां की पूजा अर्चना



Wednesday, 9 October 2024

नवरात्रि महोत्सव का सातवां दिन

 *|| मां कालरात्रि ||* 


आज शारदीय नवरात्र का सातवां दिन है, नवरात्र के सातवें दिन माता के कालरात्रि स्वरूप की पूजा- उपासना की जाती है।


*🔸आज माता का सातवां नवरात्र है।*

* नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि ने असुरों को वध करने के लिए यह रुप लिया था। पूरे श्रद्धा भाव व विधि विधान से पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आर्शीवाद प्रदान करती हैं।


*🔸मां कालरात्रि की पूजा का महत्व-:* 

* मां कालरात्रि की पूजा से अज्ञात भय, शत्रु भय और मानसिक तनाव नष्ट होता है. मां कालरात्रि की पूजा नकारात्मक ऊर्जा को भी नष्ट करती है। मां कालरात्रि को बेहद शक्तिशाली देवी का दर्जा प्राप्त है. इन्हें शुभकंरी माता के नाम से भी बुलाते हैं। मां कालरात्रि की पूजा रात्रि में भी की जाती है।


*🔸मां कालरात्रि का स्वरूप-:* 

* मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में बहुत ही भंयकर है, लेकिन मां कालरात्रि का हृदय बहुत ही कोमल और विशाल है. मां कालरात्रि की नाक से आग की भयंकर लपटें निकलती हैं. मां कालरात्रि की सवारी गर्धव यानि गधा है. मां कालरात्रि का दायां हाथ हमेशा उपर की ओर उठा रहता है, इसका अर्थ मां सभी को आशीर्वाद दे रही हैं। मां कालरात्रि के निचले दाहिने हाथ की मुद्रा भक्तों के भय को दूर करने वाली है. उनके बाएं हाथ में लोहे का कांटेदार अस्त्र है. निचले बाएं हाथ में कटार है।


*🔸मां कालरात्रि की कथा-:*

* रक्तबीज का किया था वध पौराणिक कथा के मुताबिक दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में अपना आंतक मचाना शुरू कर दिया तो देवतागण परेशान हो गए और भगवान शंकर के पास पहुंचे. तब भगवान शंकर ने देवी पार्वती से राक्षसों का वध कर अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा. भगवान शंकर का आदेश प्राप्त करने के बाद पार्वती जी ने दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध किया. लेकिन जैसे ही मां दुर्गा ने रक्तबीज को मारा उसके शरीर से निकले रक्त की बूंदों से लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए. तब मां दुर्गा ने मां कालरात्रि के रूप में अवतार लिया. मां कालरात्रि ने इसके बाद रक्तबीज का वध किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को अपने मुख में भर लिया/


*🔸पूजा विधि-:* 

* मां कालरात्रि की पूजा आरंभ करने से पहले कुमकुम, लाल पुष्प, रोली लगाएं. माला के रूप में मां को नींबुओं की माला पहनाएं और उनके आगे तेल का दीपक जलाएं. मां को लाल फूल अर्पित करें। मां कालरात्रि को *गुड़* का व गुड से बनी हुई चीजों का भोग लगाएं। इसके बाद मां के मन्त्रों का जाप या सप्तशती का पाठ करें. इस दिन मां की पूजा के बाद शिव और ब्रह्मा जी की पूजा की जाती है।


*🔸मां कालरात्रि का मंत्र-:* 


1- या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


2- ॐ कालरात्रि देव्ये नम:


                  *जय माता दी*

Monday, 7 October 2024

नवरात्रि पर्व का पांचवा दिन

 *स्कंदमाता- माँ का पांचवां रूप* 


आज नवरात्र का पंचम दिन है, आज के दिन 'मां स्कंदमाता' की पूजा उपासना की जाती है।


*🔸 स्कंदमाता का ध्यान-:* 


सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया। 

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ 


माँ दुर्गाजी के पाँचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। भगवती दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं माँ स्कंदमाता।


नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। माँ अपने भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती है और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहते है।


भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस इस पाँचवें स्वरूपको स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।


*🔸अव्यक्त भाव हैं माता के आभूषण-:* 


देवी भगवती का पांचवा स्वरूप करुणा, दया, क्षमा, शीलता से युक्त है। अपनी संतान के प्रति मां के अव्यक्त भाव ही इनके आभूषण हैं। चुतुर्भुजी मां की गोद में स्कन्दकुमार हैं। दोनों हाथों में कमल पुष्प हैं। एक हाथ में बालक और एक हाथ से वे आशीर्वाद प्रदान करती हैं। शुभ और ज्योत्सनामयी मां को पद्मासना भी कहा गया है। इनकी पूजा से स्कन्द भगवान की पूजा स्वयं हो जाती है।


स्कन्दमाता की सर्वश्रेष्ठ पूजा तो यह है कि अपनी मां के चरण वंदन करें और उनकी सेवा करें। अपनी मां की सेवा करने से ग्रहों की शान्ति अपने आप ही हो जाती है। लोगों को चाहिए कि सर्वप्रथम वे अपनी मां को सुंदर वस्त्र अर्पण करें और उसकी सेवा करें।।


*🔸स्कंदमाता का भोग प्रसाद-:* 

 स्कंदमाता को केले का भोग, मिश्री, खीर इत्यादि का भोग अति प्रिय है।।


*🔸स्कंद माता का मंत्र-:* 

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥


*ध्यान-:* 

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी 

 ll *जय माता दी* 🌷

Friday, 4 October 2024

नवरात्रि महोत्सव का दूसरा दिन

 *मां ब्रह्मचारिणी*

           


*नवरात्रि पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का रूप शांत, सौम्य और मोहक है। मां की उपासना से मन संयमित रहता है। मां की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार व संयम की प्राप्ति होती है।* 


*मां ब्रह्मचारिणी तप का आचरण करने वाली हैं, इसलिए मां के भक्तों को साधक होने का फल प्राप्त होता है।* 


*मां ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र धारण किए हैं और दाएं हाथ में अष्टदल की माला और बाएं हाथ में कमंडल लिए सुशोभित हैं। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने कठोर तप किया, जिस कारण तपश्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। अपर्णा और उमा भी इनके नाम हैं। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। मां की उपासना से जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होता है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से जीवन के कठिन समय में भी मन कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता है। देवी मां की कृपा से सर्वत्र सिद्धि तथा विजय की प्राप्ति होती है। मां भगवती को नवरात्र के दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए। और जरूरत मंद को  दान में भी चीनी शक्कर देनी चाहिए।* 


*मान्यता है कि ऐसा करने से दीर्घायु का आशीष मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बने व्यंजन जरूर अर्पित करें। मां की पूजा करने से सभी काम पूर्ण होते हैं, बाधाएं दूर हो जाती हैं और विजय की प्राप्ति होती है। हर तरह की परेशानियां खत्म होती हैं।* 


*मां ब्रह्मचारिणी को श्वेत और सुगंधित पुष्प अर्पित करें। मां के दिव्य स्वरूप का पूजन करने मात्र से आलस्य, अंहकार, लोभ, असत्य, ईर्ष्या जैसी दुष्प्रवृत्तियां दूर हो जाती हैं। मां का स्वरूप समस्त शक्तियों को एकाग्र कर बुद्धि विवेक व धैर्य के साथ सफलता की राह पर बढ़ने की सीख देता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय गुड़हल और कमल का फूल अवश्य अर्पित करें।*


           *Research Astrologers Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.)& Monita Verma Astro Vastu.... Astro. Research Centre Ludhiana Punjab Bharat Phone number 9417311379, 7888477223.  www.astropawankv.com*

Thursday, 3 October 2024

नवरात्रि पर्व


नवरात्रि महोत्सव


सनातन परंपरा/संस्कृति में नवरात्र काल को विशेष पवित्र समय माना गया है। यह समय एक विशेष ऊर्जा का समय होता है। इस समय की हुई साधनाओं से आप आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।


* पवित्र नवरात्र के समय में सौरमंडल में ग्रह- नक्षत्र- निहारिकाओं कें कुछ विशेष संयोग बनतें है। और इस समय के दौरान किए गए जप- तप- साधना-अनुष्ठान- व्रत- उपवास- दान- पुण्य इत्यादि के कई गुना शुभ व सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होतें है। 


* इस समय के दौरान आपका आहार- विहार जितना पवित्र होगा उतना ही आपका मन भी पवित्र होता जाएगा और आपके द्वारा किए हुए जप- तप- अनुष्ठान का आपको कई हजार गुना शुभ फल प्राप्त होंगे,आपकी साधनाएं सफल व सिद्ध होगी।


* नवरात्र के दिनों में शुद्धता व पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। काम क्रोध, मद, लोभ, अहंकार जैसे विजातीय तत्वों से दूर है।


* नवरात्रि के दिनों में सात्विक भोजन व पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। कम बोले, मौन व्रत का पालन ज्यादा से ज्यादा करें, अनर्गल वार्तालाप से बचें/जप व स्वाध्याय में ज्यादा समय बिताएं।


* अगर आप नवरात्र का व्रत रखते हैं तो बहुत अच्छी बात है, आप नियम के साथ व्रत रखिए। अगर आप व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो आप विधिवत पूजा भी कर सकते हैं। अगर आपका स्वास्थ्य आपका साथ दे रहा है तभी आप व्रत रखें/ लेकिन इस समय केवल सात्विक व घर का भोजन ही करें।


* नवरात्री में देवी दुर्गा को तुलसी या दूर्वा घास अर्पित न करें इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए।


* नवरा‍त्र पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले रोली या कुमकुम से पूजन स्थल के दरवाजे के दोनों ओर स्वास्तिक बनाया जाना शुभ रहता है।


* नवरात्र के दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पाठ के साथ कवच, कीलक अर्गला का पाठ भी करना चाहिए। अगर 1 से 13 अध्याय का पाठ हर दिन नहीं पाए तो हर दिन एक-एक चरित्र का पाठ करें। सप्तशती को 3 चरित्र में बांटा गया है प्रथम, मध्यमा और उत्तम।


* नवरात्र के दिनों में हो सके तो प्रतिदिन जोत लें या छोटा हवन करें। क्योंकि यह मां को अति प्रिय है।


* घर में कुछ उपलब्ध वस्तुओं से भी हवन किया जा सकता है जैसे-: लौंग , इलायची, किसमिस, काजू, छुआरा, नारीयल का बुरादा ( चिटकी), जौ हवन सामग्री, इत्यादि जो भी उपलब्ध हो।


* हवन या ज्योत में गाय का शुद्ध देसी घी का ही प्रयोग करें/शुद्ध तिल्ली का तेल भी काम में ले सकते है।


* नवरात्र में नौ कन्याओं को भोजन कराएं। नौ कन्याओं को नवदुर्गा मानकर पूजन करें। बेहतर होगा कि नियमित एक कन्या को भोजन कराएं और अंतिम दिन भोजन के बाद उस कन्या को वस्त्र, फल, श्रृंगार सामग्री देकर विदा करें।


* नवरात्र के भोग में मां दुर्गा को रोजाना फल/ फूलअर्पित करें। इन फलों को भोग लगाने के बाद आप परिवार के लोग ग्रहण कर सकते हैं।।


* नवरात्रि का समय एक ऐसी दिव्य ऊर्जा का काल है जिसमें आप अपने ईष्ट की साधना करके अपने अंदर दिव्यता और सकारात्मकता ला सकते हैं l

Wednesday, 2 October 2024

सर्व पितृ तर्पण

 || अमावस्या पितरो का विदाई दिवस ||

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उनसे प्रार्थना करें कि हे हमारे समस्त ज्ञात अज्ञात पितृ गण हमने सच्चे मन से आपका तर्पण श्राद्ध  किया है, यदि हमसे कुछ भूल हो गयी हो तो हमें क्षमा करें, हम पर सदैव अपना स्नेह, अपना आशीर्वाद बनाये रखे, हमारे घर, हमारे परिवार, हमारे कारोबार के किसी भी प्रकार के संकटों को दूर करें एवं प्रसन्न होकर अपने लोक में पधारे।


हिन्दु धर्म में पीपल का बहुत ही प्रमुख स्थान है ।पीपल  में 33 कोटि देवी देवता का वास माना गया है । भगवान वासुदेव ने भी कहा है कि वृक्षों में मैं पीपल हूँ । पीपल में हमारे पितरों का भी वास माना गया है इसलिए श्राद्धपक्ष में ज्यादा महत्व है।


फल पुष्प जल से पितरों को करें तृप्त अश्विन अमावस्या से मध्यान्ह काल में वह दरवाजे पर आकर बैठ जाते हैं। उस दिन यदि श्राद्ध नहीं किया जाता तो वह श्राप देकर लौट जाते हैं। अत: अमावस्या के दिन पत्र, पुष्प, फल, जल तर्पण से यथाशक्ति उनको तृप्त करना चाहिए। 


देव लोक में उपस्थित पितृ अमृत के रूप में, गन्धर्व योनि में उपस्थित पितृं को भोग्य रूप में, पशु योनि में तृण रूप में, सर्प योनि में वायु रूप में, यक्ष योनि में पेय रूप में, दानव योनि में मास रूप में, प्रेत योनि में रूधिर रूप में, मानव योनि में अन्न रूप में वह उपलब्ध हो जाता है। 


अमावस्या पर पितरों के लिए पके हुए चावल, काले तिल मिलाकर पिंड बनाए और श्राद्ध कर्म के बाद इसे नदी में प्रवाहित करें। इस दिन घर में शुद्ध मन से सात्विक भोजन बनाना चाहिए। इसमें मिष्ठान, पूड़ी, खीर आदि जरूर शामिल हों। इस भोजन में गाय, कुत्ते, चींटी और कौआ के लिए एक-एक हिस्सा पहले ही निकाल दें। देवताओं के लिए भी भोजन पहले निकाले और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दक्षिणा आदि देकर विदा करें। 


सर्व पितृ अमावस्या पर न करें ये कार्य

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सर्व पितृ अमावस्या के दिन किसी भी जीव या अतिथि का निरादर नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करें।इस दिन तुलसी की पूजा न करें और न ही उसके पत्ते उतारने चाहिए।  ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।सर्व पितृ अमावस्या पर चना, हरी सरसों के पत्ते, जौ, मसूर की दाल, मूली, लौकी, खीरा और काला नमक खाने से परहेज करना चाहिए।


ऐसें दें पितरों को विदाई

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धरती से पितरों को विदा करने के लिए 02 अक्टूबर को पितृ अमावस्या के दिन अमावस्या की संध्याकाल में किसी भी नदी किनारे तीस घी की बत्तियां बनाकर किसी भी दोने में रखकर प्रवाहित करें तथा अपने पितृं या पितृ अमावस्या पर करते हुए उन्हें विदाई दें। उनसे अपने परिवार की कुशलक्षेम का आशीर्वाद लें तथा फिर अगले वर्ष आने का निमंत्रण दें। 


            || जय हो पितृ देव आपको ||

                      

Wednesday, 18 September 2024

पितृ पक्ष...

 पितृ पक्ष


    पितृपक्ष जिन्हें श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है, प्रारंभ हो गए हैं, और ऐसे में अपने पूर्वज जिन्हें हम पितृ बोलते हैं, उनको याद अवश्य करना चाहिए। इस हेतु उनके निमित्त पूरी और खीर समर्पित करना चाहिए। ऐसा नहीं कर सकते हैं तो कम से कम दो रोटी अतिरिक्त बनाएं । और एक गाय को एक कुत्ते को और हो सके तो एक कौवे को खिलाएं। साथ ही घर के साउथ वेस्ट में पितरों के निमित्त एक आटे का दीपक बनाकर संध्या के समय अवश्य प्रज्वलित करें। और अपने पितरों से प्रार्थना करें कि उनका आशीर्वाद आपको निरंतर प्राप्त होता रहे। यदि किसी समस्या से आप जूझ रहे हैं तो उस समस्या को मन में सोच कर उसको दूर करने का आशीर्वाद भी आप उनसे मांगे। और उन्हें याद करें। 

   पितृ जो होते हैं वह हमारे पूर्वज ही होते हैं, वह आपसे कुछ नहीं चाहते, सिर्फ मान सम्मान ही चाहते हैं। और इस समय आप उनको याद कर लें यह अपने आप में बड़ी बात है। उनको सम्मान दें।


*राम राम जी*

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Monday, 19 August 2024

रक्षाबंधन मुहुर्त

 *रक्षाबंधन मुहूर्त व विधि*

भाई बहन के पावन रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन हिन्दू धर्मावलंबियों द्वारा युगों से मनाया जा रहा है इस त्योहार के माध्यम से भाई बहन के बीच आपसी जिम्मेदारी और स्नेह में वृद्धि होती है।


रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है।


*रक्षाबंधन शुभ समय*

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इस वर्ष रक्षाबंधन 19 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओ के अनुसार इस दिन भद्रा काल प्रातः 05:52 बजे से दोपहर 13:32 बजे तक रहेगा। इस समय में बहनों द्वारा भाइयों को राखी बांधना अशुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधने के लिए भद्रा काल के पश्चात का समय ही उपयुक्त माना जाता है।


इसलिए, दोपहर 13:32 बजे के बाद से राखी बांधने का शुभ मुहूर्त शुरू होगा, जो सायंकाल 16:21 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, प्रदोष काल में शाम 18:56 बजे से रात 21:08 बजे तक भी राखी बांधने का शुभ समय रहेगा। ज्योतिष के अनुसार 19 अगस्त को उपाकर्म और यज्ञोपवीत धारण करने के लिए सम्पूर्ण दिन शुभ रहेगा, क्योंकि इन कार्यों में भद्रा का विचार नहीं किया जाता है। इसलिए, सूर्योदय के पश्चात पूरे दिन में उपाकर्म और जनेऊ धारण किया जा सकता है। शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए राखी बांधें और इस पवित्र त्योहार को धूमधाम से मनाएं।


*आप सभी जन को Astropawankv की पूरी Team की तरफ़ से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं.....*


*Scientific Astrology and Vastu Research Centre Ludhiana Punjab Bharat Phone number 9417311379*


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Sunday, 21 July 2024

गुरु पूर्णिमा पर्व

 *पूर्णिमा पर्व*


इस वर्ष गुरु पूर्णिमा  का पर्व 21 जुलाई को मनाया जायेगा।


  गुरु पूर्णिमा कब होती है।


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             आषाढ मास की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहा जाता है।


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             चातुर्मास के चार मास तक प्रवाचक,  साधु संत एक ही स्थान पर रह कर ज्ञान गंगा बहाते है। चातुर्मास के चार मास मौसम के अनुसार भी सर्वश्रेष्ठ होते है  अध्यन के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माने गये है। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता और फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है उसी प्रकार गुरु चरणो मे  उपस्थित साधक को ग्यान शक्ति   और भक्ति प्राप्त होती है।


गुरु पूर्णिमा किस के नाम पर मनायी जाती है।


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         गुरु पूर्णिमा गुरु की पूजा अर्चना के लिए विशेषतः मनायी जाती है। महाभारत के रचियता कृष्ण द्वैपायन का जन्म गुरु पूर्णिमा के दिन हुवा था। कृष्ण द्वैपायन संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित थे और चारो वेदो के रचियता भी कृष्ण द्वैपायन ही थे इस लिए इनको में वेद व्यास भी कहा जाता है। कृष्ण द्वैपायन के सम्मान में इस पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। भक्ति काल में संत कबीर के शिष्य श्री घासी दास का जन्म भी इसी दिन हुवा था।


शास्त्रो के अनुसार गुरु का अर्थ।


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                शास्त्रो के अनुसार गु का अर्थ- अंधकार मूल अज्ञान और रु का अर्थ- निरोधक अर्थात अंधकार हटाकर प्रकाश की ओर लेजाने वाले को ही गुरु कहते है।


 गुरु का महत्व।


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             गुरु के विना ज्ञान नही मिल सकता है। गुरु को पाने के लिए भी उतनी ही तपस्या करनी पडती है जितनी ईश्वर को पाने के लिए।  सच्चा गुरु ही हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ला सकता है। संत कबीर दास जी ने गुरु को ईश्वर से भी बडा निम्न दोहे  में बताया है।


*"गुरु गोबिन्द दोऊ खडे, काके लागू पाय।*


*बलिहारी गुरु आपने, गोबिन्द दिये बताय।।"*


*गुरु पूर्णिमा की... आप सभी जन को हार्दिक शुभकामनाएं*


                   🙏🙏


 *गुरु ह्रदय में , सदा  गुरु  ही है  भ्रम  का  काल*


*गुरु  अवगुण  को  मेटते,  मिटे  सभी  भ्रमजाल*




*मेरे सुख-दुख में, अच्छे- बुरे वक्त में , व्यवसाय के क्षेत्र में या सामाजिक व धार्मिक कार्य में, कोई मित्र के रूप में , कोई मार्गदर्शक के रूप में तो कोई शुभचिंतक के रूप में  आप लोगों ने मुझे समय समय पर मार्गदर्शन देकर मेरे मनोबल को बढ़ाया है, मुझे सही रास्ता दिखाया है*, 


*आप जैसे सभी आदरणीय स्नेही मित्र शुभचिंतकों  व पूज्यनीय गुरुओं को नतमस्तक होकर प्रणाम करता हूँ और गुरुपूर्णिमा की बधाई देता हूँ....*


               🙏🙏



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Saturday, 20 April 2024

ध्यान रखें कि हमेशा अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है

 * *ध्यान रखें कि हमेशा अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है*

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अश्वथामा और अर्जुन ने छोड़ दिए थे ब्रह्मास्त्र, इसके बाद 

  अधूरे ज्ञान की वजह से अश्वथामा को मिला शाप-


किसी भी काम में सफलता चाहते हैं तो उस काम से जुड़ा पूरा ज्ञान हमें होना चाहिए, तभी काम में सफलता मिल सकती है। अगर अधूरे ज्ञान के साथ कोई काम करेंगे तो ये हमारे लिए नुकसान दायक हो सकता है। महाभारत के एक प्रसंग से समझ सकते हैं कि हमारे लिए अधूरा ज्ञान कितना खतरनाक हो सकता है... अश्वथामा को था ब्रह्मास्त्र का अधूरा ज्ञान महाभारत युद्ध के बाद का प्रसंग है। दुर्योधन ने मृत्यु से पहले अश्वत्थामा को कौरव सेना का आखिरी सेनापति नियुक्त किया।


 उसने पांडवों के पांच पुत्रों, धृष्टधुम्र, शिखंडी सहित कई योद्धाओं को अकेले ही मार दिया। इसके बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ। अर्जुन भी उसके वध का प्रण कर घूम रहा था। दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। दोनों के गुरु द्रौणाचार्य थे। सभी शस्त्रों के संधान में दोनों ही कुशल थे। युद्ध भयानक होता जा रहा था। अश्वत्थामा ने अर्जुन पर ब्रह्मास्त्र चला दिया। जवाब में अर्जुन ने भी अश्वत्थामा पर ब्रह्मास्त्र छोड़ा। दोनों अस्त्रों से पूरी धरती और मानव जाति का विनाश हो जाता। ये देखकर वेद व्यास बीच में आए और उन्होंने दोनों ब्रह्मास्त्रों को रोक दिया।


अर्जुन और अश्वत्थामा दोनों को ही उन्होंने बहुत समझाया। दोनों को अपने-अपने अस्त्र वापस लेने को कहा, अर्जुन ने व्यासजी का कहा मानकर तुरंत अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया लेकिन अश्वत्थामा ने नहीं लिया। वेद व्यास ने जब उससे पूछा कि तुमने अपना अस्त्र वापस क्यों नहीं लिया, तो उसने जवाब दिया कि मुझे ब्रह्मास्त्र को वापस बुलाने की विद्या का ज्ञान नहीं है। वेद व्यास बहुत क्रोधित हुए और कहा कि तुम्हें जिस विद्या का पूरा ज्ञान नहीं है उसका उपयोग ही क्यों किया। ये पूरी सृष्टि के लिए खतरा है।  ऐसा कहकर उसे शाप भी दिया। यह प्रसंग बताता है कि विद्या कोई भी हो, हमें उसका संपूर्ण ज्ञान होना चाहिए। अगर हम विद्या हासिल करने में थोड़ी भी चूक करते हैं तो हमें इसके घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


     || जय श्री कृष्ण जी ||


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Tuesday, 9 April 2024

विक्रम संवत 2081....

 विक्रम संवत नववर्ष 2081 का शुभारंभ

               चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ 

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श्रीमद् दैवीयभागवत के अनुसार-

     नौ पूर्ण अंक माना जाता है।


नव दुर्गा,नवदा भक्ति, नवग्रह,नव शक्ति,नव संवत्सर,नव जीवन, नव यौवन, नव संकल्प, नव सृष्टि, ये सभी 9 के आकडे से संबंधित है।


 चैत्र नवरात्र का महत्व क्यों है-

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जहाँ तक बात है चैत्र नवरात्र की तो धार्मिक दृष्टि से इसका खास महत्व है, क्योंकि चैत्र नवरात्र के पहले दिन आदि शक्ति प्रकट हुई थी।और देवी के कहने से ब्रह्माजी ने सृष्टि निर्णय का काम सुरू किया।इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष शुरू हुआ। चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने पहला मत्स्य अवतार लेकर पृथ्वी की स्थापना की। इसके बाद भगवान विष्णु का सातवाँ अवतार जो भगवान राम का है वह चैत्र नवरात्रा में हुआ है।


धार्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है ऋतु के बदलने के समय रोग जिसे आसुरी शक्ति कहते है।उसका अंत करने हेतु हवन पुजन आदि होते है। और मौसम परिवर्तन के कारण उपवास भी किये जाते है।


आप सभी जन को नव विक्रम संवत् 2081की हार्दिक शुभकामनाएं। ये नववर्ष आपके एवं आपके परिजनों के लिए अत्यंत शुभ एवं मंगलदायक हो।


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           || जय माँ जगदम्बे ||

                  ✍

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Monday, 25 March 2024

होली पर्व

 होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 



Tuesday, 19 March 2024

आपके कर्म से बदल जाते हैं आपके भाग्य

 *आपके कर्म से बदल जाते हैं आपके भाग्य*


प्रकृत्य ऋषि का रोज का  नियम था कि वह नगर से दूर जंगलों में स्थित शिव मन्दिर में भगवान् शिव की पूजा में लीन रहते थे। कई वर्षो से यह उनका अखण्ड नियम था।


उसी जंगल में एक नास्तिक डाकू अस्थिमाल का भी डेरा था। अस्थिमाल का भय आसपास के क्षेत्र में व्याप्त था। अस्थिमाल बड़ा नास्तिक था। वह मन्दिरों में भी चोरी-डाका से नहीं चूकता था।


एक दिन अस्थिमाल की नजर प्रकृत्य ऋषि पर पड़ी। उसने सोचा यह ऋषि जंगल में छुपे मन्दिर में पूजा करता है, हो न हो इसने मन्दिर में काफी माल छुपाकर रखा होगा। आज इसे ही लूटते हैं।


अस्थिमाल ने प्रकृत्य ऋषि से कहा कि जितना भी धन छुपाकर रखा हो चुपचाप मेरे हवाले कर दो। ऋषि उसे देखकर तनिक भी विचलित हुए बिना बोले- कैसा धन ? मैं तो यहाँ बिना किसी लोभ के पूजा को चला आता हूँ।


डाकू को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। उसने क्रोध में ऋषि प्रकृत्य को जोर से धक्का मारा। ऋषि ठोकर खाकर शिवलिंग के पास जाकर गिरे और उनका सिर फट गया। रक्त की धारा फूट पड़ी।


इसी बीच आश्चर्य ये हुआ कि ऋषि प्रकृत्य के गिरने के फलस्वरूप शिवालय की छत से सोने की कुछ मोहरें अस्थिमाल के सामने गिरीं। अस्थिमाल अट्टहास करते हुए बोला तू ऋषि होकर झूठ बोलता है। 


झूठे ब्राह्मण तू तो कहता था कि यहाँ कोई धन नहीं फिर ये सोने के सिक्के कहाँ से गिरे। अब अगर तूने मुझे सारे धन का पता नहीं बताया तो मैं यहीं पटक-पटकर तेरे प्राण ले लूँगा।


प्रकृत्य ऋषि करुणा में भरकर दुखी मन से बोले - हे शिवजी मैंने पूरा जीवन आपकी सेवा पूजा में समर्पित कर दिया फिर ये कैसी विपत्ति आन पड़ी ? प्रभो मेरी रक्षा करें। जब भक्त सच्चे मन से पुकारे तो भोलेनाथ क्यों न आते।


महेश्वर तत्क्षण प्रकट हुए और ऋषि को कहा कि इस होनी के पीछे का कारण मैं तुम्हें बताता हूँ। यह डाकू पूर्वजन्म में एक ब्राह्मण ही था। इसने कई कल्पों तक मेरी भक्ति की। परन्तु इससे प्रदोष के दिन एक भूल हो गई। 


यह पूरा दिन निराहार रहकर मेरी भक्ति करता रहा। दोपहर में जब इसे प्यास लगी तो यह जल पीने के लिए पास के ही एक सरोवर तक पहुँचा। संयोग से एक गाय का बछड़ा भी दिन भर का प्यासा वहीं पानी पीने आया। तब इसने उस बछड़े को कोहनी मारकर भगा दिया और स्वयं जल पीया। 


इसी कारण इस जन्म में यह डाकू हुआ। तुम पूर्वजन्म में मछुआरे थे। उसी सरोवर से मछलियाँ पकड़कर उन्हें बेचकर अपना जीवन यापन करते थे। जब तुमने उस छोटे बछड़े को निर्जल परेशान देखा तो अपने पात्र में उसके लिए थोड़ा जल लेकर आए। उस पुण्य के कारण तुम्हें यह कुल प्राप्त हुआ।


पिछले जन्मों के पुण्यों के कारण इसका आज राजतिलक होने वाला था पर इसने इस जन्म में डाकू होते हुए न जाने कितने निरपराध लोगों को मारा व देवालयों में चोरियां की इस कारण इसके पुण्य सीमित हो गए और इसे सिर्फ ये कुछ मुद्रायें ही मिल पायीं।


तुमने पिछले जन्म में अनगिनत मत्स्यों का आखेट किया जिसके कारण आज का दिन तुम्हारी मृत्यु के लिए तय था पर इस जन्म में तुम्हारे संचित पुण्यों के कारण तुम्हें मृत्यु स्पर्श नहीं कर पायी और सिर्फ यह घाव देकर लौट गई।


*ईश्वर वह नहीं करते जो हमें अच्छा लगता है, ईश्वर वह करते हैं जो हमारे लिए सचमुच अच्छा है। यदि आपके अच्छे कार्यों के परिणाम स्वरूप भी आपको कोई कष्ट प्राप्त हो रहा है तो समझिए कि इस तरह ईश्वर ने आपके बड़े कष्ट हर लिए।*


*हमारी दृष्टि सीमित है परन्तु ईश्वर तो लोक-परलोक सब देखते हैं, सबका हिसाब रखते हैं। हमारा वर्तमान, भूत और भविष्य सभी को जोड़कर हमें वही प्रदान करते हैं जो हमारे लिए उचित है। इसलिए आप अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करें कि आप क्या सोचते हैं और क्या कर रहे हैं। आपकी तनिक सी गलत सोच आपके अच्छे कर्म को भी पीछे धकेल देती है और आपसे गलत फ़ैसला करवा सकती है।......*


*राम राम जी*


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Friday, 8 March 2024

महाशिवरात्रि पर्व....

महाशिवरात्रि पर्व पर आप सभी जन को हार्दिक शुभकामनाएं






Wednesday, 14 February 2024

बसंत पंचमी.....

 राम राम जी*




*बसंतोत्सव (बसंत पंचमी)* 


            *"************


जय हो माँ शारदा -


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किसी को लय, किसी को गीत 


        किसी को साज देती हो, 




हे सरस्वती माँ ज़िस पर मेहरबान


         होती हो उसे आवाज देती हो ।


                  


सरस्वती और लक्ष्मी में से सरस्वती को इसलिये बड़ी माना गया है, कि सरस्वती से तो लक्ष्मी को प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन लक्ष्मी से सरस्वती प्राप्त नहीं की जा सकती अर्थात बुद्वि से धन कमाया जा सकता है धन से बुद्वि प्राप्त नहीं की जा सकती..!




सरस्वतीजी के बीज मंत्र 


      ****"********


देवी सरस्वती का आह्वान करने वाला बीज मंत्र 


   और दो शब्दों ह्रीं श्रीं पर आधारित है 


 


ॐ ह्रीं श्रीं सरस्वत्यै नमः।


   ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः।।




अर्थ: देवी सरस्वती को प्रणाम।लाभ:- सरस्वती के इस मंत्र का जाप करने से बुद्धि और वाणी की शक्ति बढ़ती है।




2- सरस्वती ध्यान मंत्र-


       *************


ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम्।


 हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ॐ।।




3- सरस्वती विद्या मंत्र


         ***********


सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।


 विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा।।




लाभ:- इससे स्मृति, अध्ययन में शक्ति 


               और एकाग्रता में सुधार होता है।




4- श्री सरस्वती पुराणोक्त मंत्र-


          **************


या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता। 


 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।




हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल वसंत पंचमी का त्योहार 14 फरबरी 2024 दिन बुधवार को मनाया जाएगा।  इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। वसंतोत्सव की शुरुआत होती है। ये वसंतोत्सव होली तक चलता है। इस उत्सव को मदनोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन ज्ञान, कला और संगीत की प्रतीक मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

आप सभी जन को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं



Friday, 26 January 2024

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

 || आज गणतंत्र दिवस है ||

      

भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था तथा 26 जनवरी 1950 को इसके संविधान को आत्मसात किया गया, जिसके अनुसार भारत देश एक लोकतांत्रिक,संप्रभु तथा गणतंत्र देश घोषित किया गया।


26 जनवरी 1950 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। यह ऐतिहासिक क्षणों में गिना जाने वाला समय था। इसके बाद से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है।


हमारा संविधान देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है।आज हर नागरिक को भारत की गौरव-गाथा पर गर्व का अनुभव होता है। आजादी के बाद हम भारतवासियों ने बेशुमार उपलब्धियां हासिल की हैं, आज इन्हीं उपलब्धियों का जश्न और उत्सव मनाने का दिन है। आज हमें देश को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान बनाने वाले महापुरुषों को भी नमन करना चाहिए। हम और हमारा देश, बाबासाहब भीमराव आम्बेडकर का सदैव ऋणी रहेगा जिन्होंने संविधान निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


    || गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं ||




                

Thursday, 25 January 2024

पुष्य नक्षत्र और पीपल वृक्ष

 पुष्य नक्षत्र.... पीपल का वृक्ष


नक्षत्र के वृक्ष होते है जिस नक्षत्र में आप का जन्म हो उस के वृक्ष की पूजा फल ,फ़ुल , जड़ के उपयोग से हम उपचार कर सकते है या जो नक्षत्र अशुभ ग्रस्त हो उसका भी उपचार हो सकता है। 

आज पुष्य नक्षत्र है उसका वृक्ष पीपल है । हमारी हिंदू संस्कृति में पीपल की गणना पवित्र वृक्ष में होती है ।भगवान कृष्ण जी ने गीता में कहा है वृक्षों में मैं पीपल हूं । पुष्य नक्षत्र में पीपल के ११ पत्ते लाकर व्यापार रोज़गार की जगह पे रखनें से धंधा -रोज़गार में फ़ायदा होता है । उसके औषधि गुण भी ज़्यादा है। पीपल के पत्ते खाने से दांत में दर्द हो तो उसमें लाभ होता है ।मान्यता है. कि पीपल के वृक्ष में कई औषधीय गुण छुपे हुए हैं. इस वृक्ष की पत्तियों से लेकर, फल और जड़ तक सभी हिस्से गुणकारी हैं.


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 पीपल का वृक्ष सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला वृक्ष है. इसमें प्रोटीन, फैट, कैल्शियम, आयरन इत्यादि कई  जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं. आयुर्वेद के मुताबिक पीपल के वृक्ष से कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. इस वृक्ष में मौजूद गुण सांस, दांत, सर्दी-जुकाम, खुजली और नकसीर , गुप्त रोग, प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य  परेशानियों इत्यादि को दूर करने में कारगर हैं. मान्यता है. पीपल के वृक्ष में कई औषधीय गुण छुपे हुए हैं. इस पेड़ की पत्तियों से लेकर, फल और जड़ तक सभी हिस्से गुणकारी हैं. पीपल का वृक्ष सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला वृक्ष होने के साथ साथ अपने आप में बहुत ही ज्यादा रहस्य समेटे हुए है जन्म से लेकर मृत्यु तक यह मानव जाति पशु पक्षियों के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हुआ है


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 इसमें प्रोटीन, फैट, कैल्शियम, आयरन इत्यादि जैसे कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं. आयुर्वेद के मुताबिक पीपल के वृक्ष से कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है.


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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह गुरु ग्रह से संबंधित है और इसमें सूर्य के गुण भी विद्यमान हैं अगर आपकी जन्म कुंडली में गुरु, सूर्य, शनि ग्रह शुभ या अशुभ स्थिति में  है और आपको उनके फल अनुकूल नहीं मिल रहे हैं तो आपके लिए पीपल का वृक्ष उपाय परहेज़ के रूप बहुत ही ज्यादा उपयोगी सिद्ध हो सकता है आप इसके दुबारा उपाय करके अपने लिए अनुकूल फल प्राप्त कर सकते हैं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार  ग्रहों के उपायों में, हवन पाठ में, ग्रहों की शुभ, अशुभ स्थिति ज्ञात होने पर उपाय/परहेज़ के रूप में  प्राचीन काल से ही पीपल के वृक्ष को प्रयोग में लाया जाता  रहा है वैज्ञानिकों ने भी इस पर अपने शोधों में पाया कि इसमें बहुत  ज्यादा औषधियां गुण तत्व है.. प्रकृति के लिए बहुत ज़रूरी है....

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अपनी जन्मकुंडली में ग्रहों की शुभ, अशुभ स्थिति की ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें...

🙏🙏

राम राम जी

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Monday, 22 January 2024

हार्दिक शुभकामनाएं

 सज गया  अयोध्या धाम आ रहे हैं हम सभी के प्रभु श्री राम


महाप्रभु श्री राम जी के प्राण प्रतिष्ठा की समस्त देशवासियों को  बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई। आज का दिन हम सबके लिए शुभ दिन है जीवन का उत्तम दिन है आओ हम सब मिलकर राममय हो जाएं






Tuesday, 9 January 2024

भगवान और आप....

 *मीरा जी जब भगवान कृष्ण के लिए गाती थी तो भगवान बड़े ध्यान से सुनते थे।*


*सूरदास जी जब पद गाते थे तब भी भगवान सुनते थे।* 

*और कहाँ तक कहूँ कबीर जी ने तो यहाँ तक कह दिया:- चींटी के पग नूपुर बाजे वह भी साहब सुनता है।*

*एक चींटी कितनी छोटी होती है अगर उसके पैरों में भी घुंघरू बाँध दे तो उसकी आवाज को भी भगवान सुनते है।*

*यदि आपको लगता है कि आपकी पुकार भगवान नहीं सुन रहे तो ये आपका वहम है या फिर आपने भगवान के स्वभाव को नहीं जाना।*

*कभी प्रेम से दिल से उनको पुकारो तो सही, कभी उनकी याद में आंसू गिराओ तो सही।* *बुद्धिमान बन कर नहीं... बुद्धिहीन बन कर पुकारो उनकी याद में प्रेम से आंसू गिरायो तो सही....*


*मैं तो यहाँ तक कह सकता हूँ कि केवल भगवान ही है जो आपकी बात को सुनता है।*

*एक छोटी सी कथा संत बताते है:-*

*एक भगवान जी के भक्त हुए थे, उन्होंने 20 साल तक लगातार भगवत गीता जी का पाठ किया।*


*अंत में भगवान ने उनकी परिक्षा लेते हुऐ कहा:- अरे भक्त! तू सोचता है कि मैं तेरे गीता के पाठ से खुश हूँ, तो ये तेरा वहम है।*

*मैं तेरे पाठ से बिलकुल भी प्रसन्न नही हुआ।*


*जैसे ही भक्त ने सुना तो वो नाचने लगा, और झूमने लगा।*


*भगवान ने बोला:- अरे! मैंने कहा कि मैं तेरे पाठ करने से खुश नही हूँ और तू नाच रहा है।*

*वो भक्त बोला:- भगवान जी आप खुश हो या नहीं हो ये बात मैं नही जानता।*

*लेकिन मैं तो इसलिए खुश हूँ कि आपने मेरा पाठ कम से कम सुना तो सही, इसलिए मैं नाच रहा हूँ।*


*ये होता है भाव....*

*थोड़ा सोचिये जब द्रौपती जी ने भगवान कृष्ण को पुकारा तो क्या भगवान ने नहीं सुना?*

*भगवान ने सुना भी और लाज भी बचाई।*

*जब गजेन्द्र हाथी ने ग्राह से बचने के लिए भगवान को पुकारा तो क्या भगवान ने नहीं सुना?*

*बिल्कुल सुना और भगवान अपना भोजन छोड़कर आये।*

*कबीरदास जी, तुलसी दास जी, सूरदास जी,*

*मीरा बाई जी,  रवि दास जी श्री जी.......जाने कितने संत हुए जो भगवान से बात करते थे और भगवान भी उनकी सुनते थे।*


*इसलिए जब भी भगवान को याद करो उनका नाम जप करो तो ये मत सोचना की भगवान आपकी पुकार सुनते होंगे या नहीं?*


*कोई संदेह मत करना, बस ह्रदय से उनको पुकारना, तुम्हे खुद लगेगा की हाँ, भगवान आपकी पुकार को सुन रहे है !*

        *राधे राधे*


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Monday, 1 January 2024

वर्ष 2024 की हार्दिक शुभकामनाएं

 *राम राम जी*


*सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने|*

*लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ||*


```जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव महकता रहता है, उसी तरह यह वर्ष 2024आपके लिए हर दिन, हर पल के लिए मंगलमय हो।```

जीवन पथ पर नव वर्ष 2024मान-सम्मान, यश, कीर्ति, प्रेम और सुख शांति के साथ उन्नतिशील वर्ष हो।यह वर्ष आपके जीवन मे आपार सुख समृद्धि, संपन्नता लेकर आये ¦  यह पावन पर्व आपके जीवन को प्यार मोहब्बत खुशी उमंग उत्साह सफलता सौहार्द आदि से भर दे ! इसी मंगलकामनाओ के साथ,


   *आपको और आपके परिवार को मेरी और मेरे पुरे परिवार की तरफ से वर्ष 2024 की हार्दिक बधाई व  शुभकामनायें !*_🌹🙏🏼


*राधे कृष्णा*

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