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Thursday, 31 October 2024

दीवाली पर्व...

 आप सभी जन को Astropawankv की पूरी Team की तरफ़ से दीवाली दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं



Tuesday, 29 October 2024

धनतेरस पर्व उपाय





 *धनतेरस पर्व*


धनतेरस की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन धन और स्वास्थ्य की देवी लक्ष्मी जी और धन्वंतरि जी की पूजा की जाती है। यहां धनतेरस की पूजा विधि और कुछ खास उपाय दिए गए हैं:


धनतेरस की पूजा विधि


1. साफ-सफाई: घर की साफ-सफाई करें, विशेषकर उस स्थान को जहां पूजा करनी है।



2. कलश स्थापना: पूजा स्थल पर एक साफ स्थान पर कलश स्थापित करें और उसमें गंगाजल, अक्षत (चावल), सुपारी और कुछ सिक्के डालें।



3. मिट्टी या धातु का दीपक: एक नया दीपक खरीदें और इसे पूजा के समय जलाएं। इसे घर के मुख्य द्वार पर रखें।



4. धनतेरस के दिन दीप दान: धनतेरस की शाम को मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है।



5. लक्ष्मी-गणेश की पूजा: लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें। उन्हें पुष्प, फल, मिठाई, चावल, हल्दी और सिंदूर अर्पित करें।



6. धन्वंतरि भगवान की पूजा: धनतेरस का दिन भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन भी माना जाता है। इसलिए उनकी प्रतिमा या चित्र की पूजा करें और उन्हें दीप, पुष्प, फल आदि अर्पित करें।



7. धनतेरस मंत्र का जाप: लक्ष्मी और धन्वंतरि से संबंधित मंत्रों का जाप करें जैसे "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः" और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्वरोग निवारणाय त्रिलोक पथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूपाय श्री धन्वंतरि स्वरूपाय नमः।"




धनतेरस के विशेष उपाय


1. धातु खरीदें: इस दिन सोना, चांदी, बर्तन या धातु की कोई वस्तु खरीदना शुभ होता है, इससे आर्थिक समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।



2. धनिया के बीज: पूजा में धनिया के बीज अर्पित करें और बाद में इन्हें अपने घर में किसी पवित्र स्थान पर रखें, यह परिवार में धन-संपदा को बनाए रखने में सहायक है।



3. सिंदूर का दान: विवाहित महिलाओं को सिंदूर का दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।



4. दीपदान: धनतेरस की रात को घर के हर कमरे में एक दीपक जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।



5. झाड़ू खरीदें: मान्यता है कि धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना आर्थिक समृद्धि के लिए शुभ होता है।



6. गरीबों की मदद: धनतेरस पर गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।




इन विधियों और उपायों का पालन करने से धनतेरस के दिन आपको देवी लक्ष्मी की कृपा और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

और साथ में यम महाराज के लिए एक दीपक दक्षिण दिशा में एक मुखी या चार मुखी साथ में पितरों के नाम से पांच दीपक लगाए वह भी दक्षिण दिशा में  और पितरों के लिए समर्पित हो उनका आशीर्वाद प्राप्त हो ऐसा संकल्प ले साथ में घर के प्रत्येक कमरों में एक-एक दीपक लगाए यह दिवाली तक लगाना है जिस से घर की नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाए ...,............

जय माताजी हर हर महादेव जय पित्र देव जय लक्ष्मी कुबेर जय धन्वंतरि महाराज की जय हो

🙏🙏

*Scientific Astrology and Vastu...*

*Research Astrologers Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.) & Monita Verma Astro Vastu.... Astro Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone 9417311379  www.astropawankv.com*

Friday, 11 October 2024

नवरात्रि पर्व का नवम दिवस

  नवरात्रि पर्व का नवम दिवस...मां सिद्धिदात्री


 आज नवरात्र के आखिरी दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के नौवें रूप मां सिद्धिदात्री का पूजन, अर्चन और स्तवन किया जाता है। 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। अपने उपासक को ये सभी सिद्धियां देने के कारण ही इन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है।


*🔸नवरात्र का अंतिम दिन है विशेष-:* 

* नवरात्र के प्रमुख आकर्षण में से एक कन्या-पूजन भी है। ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की उपासना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं, उनका नवरात्र व्रत नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजने के बाद ही पूरा होता है। उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार भोग लगाकर दक्षिणा देने से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं। इसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए। शक्ति पूजन का अंतिम दिन होने से ये दिन काफी विशेष होता है/


*🔸ऐसे करें कन्या पूजन-:*


* कन्याओं को माता रानी का रूप माना जाता है। कन्याओं के घर आने पर माता रानी के जयकारे भी लगाने चाहिए। इसके बाद कन्याओं के पैर धोने चाहिए। सभी कन्याओं को आसन बिछाकर बैठाना चाहिए, फिर रोली और कुमकुम का टीका लगाने के बाद उनके हाथ में मौली बांधनी चाहिए। अब सभी कन्याओं और बालक की आरती उतारनी चाहिए। इसके बाद माता रानी को भोग लगाया हुआ भोजन कन्याओं को दें/


*🔸देवी का भोग प्रसाद-:* 


* मां भगवती को खीर, मिठाई, फल, हलवा, चना, मालपुआ प्रिय है इसलिए कन्या पूजन के दिन कन्याओं को खाने के लिए पूरी, चना और हलवा दिया जाता है। कन्याओं को केसर युक्त खीर, हलवा, पूड़ी खिलाना चाहिए। कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराना चाहिए। बालक को बटुक भैरव और लंगूरा के रूप में पूजा जाता है। देवी की सेवा के लिए भगवान शिव ने हर शक्तिपीठ के साथ एक-एक भैरव को रखा हुआ है, इसलिए देवी के साथ इनकी पूजा भी जरूरी है/


*🔸ऐसा है मां का स्वरूप-:* 


* मां दुर्गा इस रूप में श्वेत वस्त्र धारण की है। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं से युक्त हैं। इनका वाहन सिंह है। यह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प है।


*🔸मां सिद्धिदात्री की स्तुति-:* 


"या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।"


*🔸मां सिद्धिदात्री की प्रार्थना-:* 


"सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।"


*🔸मां सिद्धिदात्री के मंत्र-:* 

       "ऊं देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।।"


               *जय माता दी* 

Thursday, 10 October 2024

नवरात्रि महोत्सव का आठवां दिन

 नवरात्रि महोत्सव का आठवां दिन और मां की पूजा अर्चना



Wednesday, 9 October 2024

नवरात्रि महोत्सव का सातवां दिन

 *|| मां कालरात्रि ||* 


आज शारदीय नवरात्र का सातवां दिन है, नवरात्र के सातवें दिन माता के कालरात्रि स्वरूप की पूजा- उपासना की जाती है।


*🔸आज माता का सातवां नवरात्र है।*

* नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि ने असुरों को वध करने के लिए यह रुप लिया था। पूरे श्रद्धा भाव व विधि विधान से पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आर्शीवाद प्रदान करती हैं।


*🔸मां कालरात्रि की पूजा का महत्व-:* 

* मां कालरात्रि की पूजा से अज्ञात भय, शत्रु भय और मानसिक तनाव नष्ट होता है. मां कालरात्रि की पूजा नकारात्मक ऊर्जा को भी नष्ट करती है। मां कालरात्रि को बेहद शक्तिशाली देवी का दर्जा प्राप्त है. इन्हें शुभकंरी माता के नाम से भी बुलाते हैं। मां कालरात्रि की पूजा रात्रि में भी की जाती है।


*🔸मां कालरात्रि का स्वरूप-:* 

* मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में बहुत ही भंयकर है, लेकिन मां कालरात्रि का हृदय बहुत ही कोमल और विशाल है. मां कालरात्रि की नाक से आग की भयंकर लपटें निकलती हैं. मां कालरात्रि की सवारी गर्धव यानि गधा है. मां कालरात्रि का दायां हाथ हमेशा उपर की ओर उठा रहता है, इसका अर्थ मां सभी को आशीर्वाद दे रही हैं। मां कालरात्रि के निचले दाहिने हाथ की मुद्रा भक्तों के भय को दूर करने वाली है. उनके बाएं हाथ में लोहे का कांटेदार अस्त्र है. निचले बाएं हाथ में कटार है।


*🔸मां कालरात्रि की कथा-:*

* रक्तबीज का किया था वध पौराणिक कथा के मुताबिक दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में अपना आंतक मचाना शुरू कर दिया तो देवतागण परेशान हो गए और भगवान शंकर के पास पहुंचे. तब भगवान शंकर ने देवी पार्वती से राक्षसों का वध कर अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा. भगवान शंकर का आदेश प्राप्त करने के बाद पार्वती जी ने दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध किया. लेकिन जैसे ही मां दुर्गा ने रक्तबीज को मारा उसके शरीर से निकले रक्त की बूंदों से लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए. तब मां दुर्गा ने मां कालरात्रि के रूप में अवतार लिया. मां कालरात्रि ने इसके बाद रक्तबीज का वध किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को अपने मुख में भर लिया/


*🔸पूजा विधि-:* 

* मां कालरात्रि की पूजा आरंभ करने से पहले कुमकुम, लाल पुष्प, रोली लगाएं. माला के रूप में मां को नींबुओं की माला पहनाएं और उनके आगे तेल का दीपक जलाएं. मां को लाल फूल अर्पित करें। मां कालरात्रि को *गुड़* का व गुड से बनी हुई चीजों का भोग लगाएं। इसके बाद मां के मन्त्रों का जाप या सप्तशती का पाठ करें. इस दिन मां की पूजा के बाद शिव और ब्रह्मा जी की पूजा की जाती है।


*🔸मां कालरात्रि का मंत्र-:* 


1- या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


2- ॐ कालरात्रि देव्ये नम:


                  *जय माता दी*

Monday, 7 October 2024

नवरात्रि पर्व का पांचवा दिन

 *स्कंदमाता- माँ का पांचवां रूप* 


आज नवरात्र का पंचम दिन है, आज के दिन 'मां स्कंदमाता' की पूजा उपासना की जाती है।


*🔸 स्कंदमाता का ध्यान-:* 


सिंहासनगता नित्यं पद्‌माश्रितकरद्वया। 

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ 


माँ दुर्गाजी के पाँचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। भगवती दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं माँ स्कंदमाता।


नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। माँ अपने भक्त के सारे दोष और पाप दूर कर देती है और समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहते है।


भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस इस पाँचवें स्वरूपको स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।


*🔸अव्यक्त भाव हैं माता के आभूषण-:* 


देवी भगवती का पांचवा स्वरूप करुणा, दया, क्षमा, शीलता से युक्त है। अपनी संतान के प्रति मां के अव्यक्त भाव ही इनके आभूषण हैं। चुतुर्भुजी मां की गोद में स्कन्दकुमार हैं। दोनों हाथों में कमल पुष्प हैं। एक हाथ में बालक और एक हाथ से वे आशीर्वाद प्रदान करती हैं। शुभ और ज्योत्सनामयी मां को पद्मासना भी कहा गया है। इनकी पूजा से स्कन्द भगवान की पूजा स्वयं हो जाती है।


स्कन्दमाता की सर्वश्रेष्ठ पूजा तो यह है कि अपनी मां के चरण वंदन करें और उनकी सेवा करें। अपनी मां की सेवा करने से ग्रहों की शान्ति अपने आप ही हो जाती है। लोगों को चाहिए कि सर्वप्रथम वे अपनी मां को सुंदर वस्त्र अर्पण करें और उसकी सेवा करें।।


*🔸स्कंदमाता का भोग प्रसाद-:* 

 स्कंदमाता को केले का भोग, मिश्री, खीर इत्यादि का भोग अति प्रिय है।।


*🔸स्कंद माता का मंत्र-:* 

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।

   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥


*ध्यान-:* 

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी 

 ll *जय माता दी* 🌷

Friday, 4 October 2024

नवरात्रि महोत्सव का दूसरा दिन

 *मां ब्रह्मचारिणी*

           


*नवरात्रि पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का रूप शांत, सौम्य और मोहक है। मां की उपासना से मन संयमित रहता है। मां की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार व संयम की प्राप्ति होती है।* 


*मां ब्रह्मचारिणी तप का आचरण करने वाली हैं, इसलिए मां के भक्तों को साधक होने का फल प्राप्त होता है।* 


*मां ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र धारण किए हैं और दाएं हाथ में अष्टदल की माला और बाएं हाथ में कमंडल लिए सुशोभित हैं। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने कठोर तप किया, जिस कारण तपश्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। अपर्णा और उमा भी इनके नाम हैं। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। मां की उपासना से जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होता है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से जीवन के कठिन समय में भी मन कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता है। देवी मां की कृपा से सर्वत्र सिद्धि तथा विजय की प्राप्ति होती है। मां भगवती को नवरात्र के दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए। और जरूरत मंद को  दान में भी चीनी शक्कर देनी चाहिए।* 


*मान्यता है कि ऐसा करने से दीर्घायु का आशीष मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बने व्यंजन जरूर अर्पित करें। मां की पूजा करने से सभी काम पूर्ण होते हैं, बाधाएं दूर हो जाती हैं और विजय की प्राप्ति होती है। हर तरह की परेशानियां खत्म होती हैं।* 


*मां ब्रह्मचारिणी को श्वेत और सुगंधित पुष्प अर्पित करें। मां के दिव्य स्वरूप का पूजन करने मात्र से आलस्य, अंहकार, लोभ, असत्य, ईर्ष्या जैसी दुष्प्रवृत्तियां दूर हो जाती हैं। मां का स्वरूप समस्त शक्तियों को एकाग्र कर बुद्धि विवेक व धैर्य के साथ सफलता की राह पर बढ़ने की सीख देता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय गुड़हल और कमल का फूल अवश्य अर्पित करें।*


           *Research Astrologers Pawan Kumar Verma (B.A.,D.P.I.,LL.B.)& Monita Verma Astro Vastu.... Astro. Research Centre Ludhiana Punjab Bharat Phone number 9417311379, 7888477223.  www.astropawankv.com*

Thursday, 3 October 2024

नवरात्रि पर्व


नवरात्रि महोत्सव


सनातन परंपरा/संस्कृति में नवरात्र काल को विशेष पवित्र समय माना गया है। यह समय एक विशेष ऊर्जा का समय होता है। इस समय की हुई साधनाओं से आप आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।


* पवित्र नवरात्र के समय में सौरमंडल में ग्रह- नक्षत्र- निहारिकाओं कें कुछ विशेष संयोग बनतें है। और इस समय के दौरान किए गए जप- तप- साधना-अनुष्ठान- व्रत- उपवास- दान- पुण्य इत्यादि के कई गुना शुभ व सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होतें है। 


* इस समय के दौरान आपका आहार- विहार जितना पवित्र होगा उतना ही आपका मन भी पवित्र होता जाएगा और आपके द्वारा किए हुए जप- तप- अनुष्ठान का आपको कई हजार गुना शुभ फल प्राप्त होंगे,आपकी साधनाएं सफल व सिद्ध होगी।


* नवरात्र के दिनों में शुद्धता व पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। काम क्रोध, मद, लोभ, अहंकार जैसे विजातीय तत्वों से दूर है।


* नवरात्रि के दिनों में सात्विक भोजन व पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। कम बोले, मौन व्रत का पालन ज्यादा से ज्यादा करें, अनर्गल वार्तालाप से बचें/जप व स्वाध्याय में ज्यादा समय बिताएं।


* अगर आप नवरात्र का व्रत रखते हैं तो बहुत अच्छी बात है, आप नियम के साथ व्रत रखिए। अगर आप व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो आप विधिवत पूजा भी कर सकते हैं। अगर आपका स्वास्थ्य आपका साथ दे रहा है तभी आप व्रत रखें/ लेकिन इस समय केवल सात्विक व घर का भोजन ही करें।


* नवरात्री में देवी दुर्गा को तुलसी या दूर्वा घास अर्पित न करें इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए।


* नवरा‍त्र पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले रोली या कुमकुम से पूजन स्थल के दरवाजे के दोनों ओर स्वास्तिक बनाया जाना शुभ रहता है।


* नवरात्र के दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पाठ के साथ कवच, कीलक अर्गला का पाठ भी करना चाहिए। अगर 1 से 13 अध्याय का पाठ हर दिन नहीं पाए तो हर दिन एक-एक चरित्र का पाठ करें। सप्तशती को 3 चरित्र में बांटा गया है प्रथम, मध्यमा और उत्तम।


* नवरात्र के दिनों में हो सके तो प्रतिदिन जोत लें या छोटा हवन करें। क्योंकि यह मां को अति प्रिय है।


* घर में कुछ उपलब्ध वस्तुओं से भी हवन किया जा सकता है जैसे-: लौंग , इलायची, किसमिस, काजू, छुआरा, नारीयल का बुरादा ( चिटकी), जौ हवन सामग्री, इत्यादि जो भी उपलब्ध हो।


* हवन या ज्योत में गाय का शुद्ध देसी घी का ही प्रयोग करें/शुद्ध तिल्ली का तेल भी काम में ले सकते है।


* नवरात्र में नौ कन्याओं को भोजन कराएं। नौ कन्याओं को नवदुर्गा मानकर पूजन करें। बेहतर होगा कि नियमित एक कन्या को भोजन कराएं और अंतिम दिन भोजन के बाद उस कन्या को वस्त्र, फल, श्रृंगार सामग्री देकर विदा करें।


* नवरात्र के भोग में मां दुर्गा को रोजाना फल/ फूलअर्पित करें। इन फलों को भोग लगाने के बाद आप परिवार के लोग ग्रहण कर सकते हैं।।


* नवरात्रि का समय एक ऐसी दिव्य ऊर्जा का काल है जिसमें आप अपने ईष्ट की साधना करके अपने अंदर दिव्यता और सकारात्मकता ला सकते हैं l

Wednesday, 2 October 2024

सर्व पितृ तर्पण

 || अमावस्या पितरो का विदाई दिवस ||

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उनसे प्रार्थना करें कि हे हमारे समस्त ज्ञात अज्ञात पितृ गण हमने सच्चे मन से आपका तर्पण श्राद्ध  किया है, यदि हमसे कुछ भूल हो गयी हो तो हमें क्षमा करें, हम पर सदैव अपना स्नेह, अपना आशीर्वाद बनाये रखे, हमारे घर, हमारे परिवार, हमारे कारोबार के किसी भी प्रकार के संकटों को दूर करें एवं प्रसन्न होकर अपने लोक में पधारे।


हिन्दु धर्म में पीपल का बहुत ही प्रमुख स्थान है ।पीपल  में 33 कोटि देवी देवता का वास माना गया है । भगवान वासुदेव ने भी कहा है कि वृक्षों में मैं पीपल हूँ । पीपल में हमारे पितरों का भी वास माना गया है इसलिए श्राद्धपक्ष में ज्यादा महत्व है।


फल पुष्प जल से पितरों को करें तृप्त अश्विन अमावस्या से मध्यान्ह काल में वह दरवाजे पर आकर बैठ जाते हैं। उस दिन यदि श्राद्ध नहीं किया जाता तो वह श्राप देकर लौट जाते हैं। अत: अमावस्या के दिन पत्र, पुष्प, फल, जल तर्पण से यथाशक्ति उनको तृप्त करना चाहिए। 


देव लोक में उपस्थित पितृ अमृत के रूप में, गन्धर्व योनि में उपस्थित पितृं को भोग्य रूप में, पशु योनि में तृण रूप में, सर्प योनि में वायु रूप में, यक्ष योनि में पेय रूप में, दानव योनि में मास रूप में, प्रेत योनि में रूधिर रूप में, मानव योनि में अन्न रूप में वह उपलब्ध हो जाता है। 


अमावस्या पर पितरों के लिए पके हुए चावल, काले तिल मिलाकर पिंड बनाए और श्राद्ध कर्म के बाद इसे नदी में प्रवाहित करें। इस दिन घर में शुद्ध मन से सात्विक भोजन बनाना चाहिए। इसमें मिष्ठान, पूड़ी, खीर आदि जरूर शामिल हों। इस भोजन में गाय, कुत्ते, चींटी और कौआ के लिए एक-एक हिस्सा पहले ही निकाल दें। देवताओं के लिए भी भोजन पहले निकाले और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक दक्षिणा आदि देकर विदा करें। 


सर्व पितृ अमावस्या पर न करें ये कार्य

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सर्व पितृ अमावस्या के दिन किसी भी जीव या अतिथि का निरादर नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करें।इस दिन तुलसी की पूजा न करें और न ही उसके पत्ते उतारने चाहिए।  ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।सर्व पितृ अमावस्या पर चना, हरी सरसों के पत्ते, जौ, मसूर की दाल, मूली, लौकी, खीरा और काला नमक खाने से परहेज करना चाहिए।


ऐसें दें पितरों को विदाई

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धरती से पितरों को विदा करने के लिए 02 अक्टूबर को पितृ अमावस्या के दिन अमावस्या की संध्याकाल में किसी भी नदी किनारे तीस घी की बत्तियां बनाकर किसी भी दोने में रखकर प्रवाहित करें तथा अपने पितृं या पितृ अमावस्या पर करते हुए उन्हें विदाई दें। उनसे अपने परिवार की कुशलक्षेम का आशीर्वाद लें तथा फिर अगले वर्ष आने का निमंत्रण दें। 


            || जय हो पितृ देव आपको ||