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Thursday, 29 December 2022

प्रेम और विश्वास

 *राम राम जी*


*प्रेम और विश्वास*


*सुन्दर स्त्री बाद में शूर्पणखा निकली,*

 *सोने का हिरन बाद में मारीच निकला,*

   *भिक्षा मांगने वाला साधू बाद में रावण निकला।*


*लंका में तो निशाचार लगातार रूप ही बदलते दिखते थे, हर जगह भ्रम, हर जगह अविश्वास, हर जगह शंका लेकिन बाद इसके जब लंका में अशोक वाटिका के नीचे सीता माँ को रामनाम की मुद्रिका मिलती है तो वो अगर उस पर 'विश्वास' कर लेती वो मान जाती और स्वीकार करती कि इसे प्रभु श्री राम ने ही भेजा है......?*



*जीवन में कई लोग आपको ठगेंगे, कई लोग आपको बहुत ही निराश करेंगे, कई बार आप भी सम्पूर्ण परिस्थितियों पर संदेह करेंगे लेकिन इस पूरे माहौल में जब आप रुक कर....पुनः किसी व्यक्ति, प्रकृति या अपने ऊपर 'विश्वास' करेंगे  यानी अपने आप पर  उस व्यक्ति, प्रकृति पर पूर्ण विश्वास करेंगे तो आप रामायण के पात्र बन जाएंगे।*


*रामजी और माँ सीताजी केवल आपको.. 'विश्वास करना' ही तो सिखाते हैं।माँ कठोर हुईं लेकिन माँ से विश्वास नहीं छूटा, परिस्थितियाँ विषम हुई लेकिन उसके बेहतर होने का विश्वास नहीं छूटा, भाई - भाई का युद्ध देखा लेकिन अपने भाइयों से विश्वास नहीं छूटा, लक्ष्मण को मरणासन्न देखा लेकिन जीवन से विश्वास नहीं छूटा,सागर को विस्तृत देखा लेकिन अपने पुरुषार्थ से विश्वास नहीं छूटा, वानर और रीछ की सेना थी लेकिन विजय पर विश्वास नहीं छूटा और *प्रेम को परीक्षा और वियोग में देखा लेकिन प्रेम से विश्वास नहीं छूटा।*


*भरत का विश्वास, विभीषण का विश्वास, शबरी का विश्वास, निषादराज का विश्वास, जामवंत का विश्वास, अहिल्या का विश्वास, कोशलपुर का विश्वास और इस 'विश्वास' पर हमारा - आपका अगाध विश्वास।*


*सच बात यही है कि जिस दिन आपने ये 'विश्वास' कर लिया कि ये विश्व आपके पुरुषार्थ से ही खूबसूरत बनेगा उसी दिन ही आप 'राम' बन जाएंगे और फिर लगभग सारी परिस्थितियाँ हनुमान बनकर आपको आगे बढ़ाने में लग जाएंगी।यहाँ हर किसी की रामायण है,आपकी भी होगी। जिसमें आपके सामने सब है - रावण,शंका,भ्रम, असफलता,दुःख,दर्द आदि आदि...*


*बस आपको अपनी तरफ 'विश्वास' रखना है..*

  *आपका राम तत्व खुद उभर कर आता जायेगा।*


 || जय श्री राम जय हनुमान  ||

             

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Sunday, 25 December 2022

अशांति से शांति की तरफ़

 *अशांति से शांति की तरफ़* 


       🌻मित्रों आपको अपने जीवन में कुव्यसनों की कीमत दो बार चुकानी पड़ती है – एक बार जब आप उनके प्रभाव में आते हैं,तथा दूसरी बार जब वह आपको प्रभावित करती हैं इसलिए अपने जीवन में सदा धर्म का ही आश्रय लेकर उसमें चलने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि सच्चा धर्म इस लोक मे भी शान्ति देता हैं और अंत मे परमात्मा के चरणों मे ले जाता हैं धर्म ही मनुष्य का सच्चा धन हैं उत्तम् धन हैं, धर्म ही उसका सच्चा मित्र हैं, सच्चा बन्धु हैं, मरने के पीछे धन साथ नही जाता हैं, बल्कि धर्म ही मनुष्य के साथ जाता हैं 


🌻इसलिए मित्रो अपने परिवार मे अपनी संतान को धन  संपत्ति का उत्तराधिकारी न बना सको तो कोई बात नही परन्तु समस्त संस्कारों का उत्तराधिकारी बनाना बहुत जरुरी हैं,  धन संपत्ति से कदाचित थोडा सुख मिल सके परन्तु संस्कारों से बहुत  सुख ओर शान्ति मिलती हैं अच्छे संस्कारों से जो सुख मिलता हैं वह आपके जीवन की सबसे बड़ी सम्पत्ति है।


     🌻 सज्जनों पैसे से ही सच्चा सुख मिलता है ऐसा मनुष्य जब से समझने लगा तबसे पाप कर्मों की बढोत्तरी बढ गई हैं,जीवन मे पैसा क्षणिक सुख अवश्य देता हैं और हमारी  बहुत सी जरुरतें भी पूरी करता है और मनुष्य को धन/पैसा कमाना भी चाहिए बिना धन से धर्म की रक्षा नहीं हो सकती परन्तु अपने स्वाभिमान बेचकर एवं संस्कारों की बलि चढ़ाकर कमाया हुआ धन सम्पूर्ण परिवार को प्रभावित कर देता है इससे घर परिवार में बहुत से दोष उत्पन्न हो जाते हैं वो सभी दोष किसी पूर्ण साधु संत जी के पास जाकर पता चल सकते हैं और यह पूर्ण ग्रह दोष आपकी और आपके परिवार जन की जन्मकुंडलियों के द्वारा भी जानें जा सकते हैं यह सत्य बात हैं इसलिए अपने जीवन को हिंसात्मक बनाकर नही ,बल्कि अहिंसात्मक तरीकें से जीने का प्रयास करना चाहिए  अपने आप ब अपनी संतानों को (परिवार जन को) हमेशा यही शिक्षा दें कि वो सभी जन जीवन को पैसे के मद मे नही ,बल्कि धर्म और सत्कर्म और संस्कारों के प्रभाव मे जीने का प्रयास हमेशा करते रहें और जो ग्रह दोष उनकी जनकुंडलियों के अनुसार उनके और परिवार में पैदा हुए हैं उन्हें दूर करने के जो भी उपाय/परहेज़ हों उन्हें यथा संभव प्रयास करके करते रहना चाहिए  ताकि घर परिवार में सुख शांति समृद्धि हमेशा बनी रहे ।।

🙏🙏

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Wednesday, 21 December 2022

शनि का मकान/घर

 *राम राम जी*

आज बात करते हैं जन्मकुंडली के शनि देव की .... शनि की आशियां मकान/घर बनाने की दोस्तों आपने देखा होगा कि

चंद लोग ऐसे भी होते हैं जिनको मकान बनाना बहुत लाभ करता है जब मकान बनता है तो मजदूर के रुप में साक्षात शनिदेव इंसान के घर के अंदर घूम रहे होते हैं मकान बनने के बाद तरक्की होती हैं और उनके घर  खुशियों से भरे रहते हैं ...... और कुछ लोग  ऐसे भी होते हैं जिनकी अगर जन्म कुंडली में थोड़े से भी शनि देव जी अशुभ अवस्था में बैठे हो या जन्मकुंडली के अशुभ घर में बैठे हुए हो  या अशुभ दृष्टी के कारण उनका बुरा प्रभाव/एनर्जी हो तो इंसान के सिर चढ़कर बोलने लगते हैं  उसकी बुद्धि काम नहीं करती इंसान को समझ ही नहीं आता कि उसकी बर्बादी का कारण कब कहां से और कैसे शुरू हुआ उसका बुरा प्रभाव सबसे पहले  इंसान की रोजाना की कमाई पर आता है उसके बाद धीरे-धीरे उसका काम बंद होना शुरू होता है काम कम होना शुरू हो जाता है उसे हर काम में रूकावटें/परेशानियां आनी शुरू हो जाती है झगड़ा बहस / बदनामी शुरू हो जाती है और फिर इंसान धीरे धीरे कर्ज की दलदल में फंस कर बर्बाद होना शुरू हो जाता है उसके घर से खुशी और मंगल कार्य दूर जाना शुरू हो जाते हैं शादी विवाह मंगल कार्य घर में नहीं होते और बिमारी घर पर बसेरा कर लेती हैं.......

.... ऐसे समय में अगर कोई अच्छा एस्ट्रोलॉजर मिल जाए तो इन बातों से बचा लेता है वरना मृत्यु के बाद भी इस चीज का इलाज संभव नहीं होता आप अपने आस पास, रिश्ते नातों में , दोस्तों मित्रों में देखें उन से बात करके देखें तो आपको ऐसे हजारों उदाहरण मिल जाएंगे ट्राई कीजिए रिजल्ट आपके सामने होंगे तब आपको इंसान कहता हुआ नज़र आता होगा कि मैंने लाखों उपाय किए पर किसी भी उपाय का रिजल्ट नहीं मिलता दोस्तों उपाय का रिजल्ट तभी मिलता है जब जन्मकुंडली ओर वर्ष कुंडली ब माह कुंडली और गोचर कुंडली ओर आपके कर्मों को मिलाकर उनका गहराई से अवलोकन करके उपाय निकालें जाएं और उन सभी उपायों को जब  आप पूरे दिल से श्रद्धा से और शिद्दत से किया जाए और उपाय करने से पहले अपने अपने कुल देवी देवता जी से , नव ग्रह देवता जी  और अपने गुरू महाराज जी को प्रणाम करके ओर आशिर्वाद लेकर प्रार्थना करके किया जाए तभी अवश्य ही पूरी तरह से फलदाई होते हैं और एक बात कि जब उपाय बताने वाले की एनर्जी उपाय करने वाले की एनर्जी से ज्यादा हो..... सच्चाई है यह.. पर कड़वी है साहिब......

 ......*.पढ़े भटकते हैं लाखों पंडित हजारों सियाने जो खूब देखा तो यार खुदा की बातें खुदा ही जाने*


🙏🙏

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Sunday, 4 December 2022

राहु... राजनीति

 

राजनीति में कभी भी सोच नहीं होती वक्त और व्यक्तित्व होता है

व्यक्तित्व भी वक्त के हिसाब से बदल दिए जाते हैं दरकिनार कर दिए जाते हैं वक्त के आगोश में खो जाते हैं। 

 राजनीति का मूल राहु है राहु सदैव ही परिवर्तनशील है कभी भी एक जैसा नहीं रहता वक्त को बहुत ही तेजी से पहचानता है अपना ही फ़ायदा देखता है और अपने लाभ के लिए परिवर्तन भी कर लेता है ।क्षण क्षण बदलता है जो क्षण क्षण ना बदले तो राहु कैसा..........

 हालांकि यह एक पहलू यह भी है कि राजनीतिक समर्थक केतु होते हैं और राजनेता राहु होते हैं। समर्थक कई पीढ़ियों से या लंबे वक्त से इसी स्वभाव को जीते रहते हैं लेकिन राजनेता दल बदलने के समय समर्थकों से बात करने की तो दूर की बात है वो अपने चेहरे पर भाव भी नहीं लाते कि हम बदल रहे हैं। समर्थक तो बेचारे अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते हैं। 

  हालांकि जब कभी बहुत ज्यादा निराश हो जाते हैं तब समर्थक केतू अपने आपको एक बहुत बड़ी भीड़ के रुप में यानी राहु के रूप में बदल जाते हैं लेकिन फिर से उसी भीड़ में से किसी व्यक्ति व्यक्तित्व को खड़ा करके खुद दोबारा  फिर से केतु बन जाते हैं। फिर से दोबारा वही केतु वाला स्वभाव क़ायम हो जाता है फिर कोई कहता है कि मैं फलाने नेता जी के साथ हूँ और कोई तो फलाने नेता जी जैसा बन जाते हैं देखने सुनने में आता है


 यानी कि *"पहुंची वहीं पर ख़ाक जहां का ख़मीर था"*

Tuesday, 22 November 2022

गुरु ज्ञान

 || गुरु और शिष्य ||

      *********

ज्ञान हमेशा झुककर ही हासिल किया 

 जा सकता है खुद को ज्ञानी समझने से नहीं।।


एक शिष्य गुरू के पास आया। शिष्य पंडित था और मशहूर भी, गुरू से भी ज्यादा। सारे शास्त्र उसे कंठस्थ थे। समस्या यह थी कि सभी शास्त्र कंठस्थ होने के बाद भी वह सत्य की खोज नहीं कर सका था। ऐसे में जीवन के अंतिम क्षणों में उसने गुरू की तलाश शुरू की। संयोग से गुरू मिल गए। वह उनकी शरण में पहुंचा।


गुरू ने पंडित की तरफ देखा और कहा, 'तुम लिख लाओ कि तुम क्या-क्या जानते हो। तुम जो जानते हो, फिर उसकी क्या बात करनी है। तुम जो नहीं जानते हो, वह तुम्हें बता दूंगा।'  शिष्य को वापस आने में सालभर लग गया, क्योंकि उसे तो बहुत शास्त्र याद थे।वह सब लिखता ही रहा, लिखता ही रहा। कई हजार पृष्ठ भर गए। पोथी लेकर आया। गुरू ने फिर कहा, 'यह बहुत ज्यादा है। मैं बूढ़ा हो गया। मेरी मृत्यु करीब है। इतना न पढ़ सकूंगा। तुम इसे संक्षिप्त कर लाओ, सार लिख लाओ।'


पंडित फिर चला गया। तीन महीने लग गए। अब केवल सौ पृष्ठ थे। गुरू ने कहा, मैं  'यह भी ज्यादा है। इसे और संक्षिप्त कर लाओ।' कुछ समय बाद शिष्य लौटा। एक ही पन्ने पर सार-सूत्र लिख लाया था, लेकिन गुरू बिल्कुल मरने के करीब थे। कहा, 'तुम्हारे लिए ही रूका हूं। तुम्हें समझ कब आएगी? और संक्षिप्त कर लाओ।' शिष्य को होश आया। भागा दूसरे कमरे से एक खाली कागज ले आया। गुरू के हाथ में खाली कागज दिया। गुरू ने कहा, 'अब तुम शिष्य हुए। मुझसे तुम्हारा संबंध बना रहेगा।' कोरा कागज लाने का अर्थ हुआ, मुझे कुछ भी पता नहीं, मैं अज्ञानी हूं। जो ऐसे भाव रख सके गुरू के पास, वही शिष्य है।


निष्कर्ष: -


गुरू तो ज्ञान-प्राप्ति का प्रमुख स्त्रोत है, उसे अज्ञानी बनकर ही हासिल किया जा सकता है। पंडित बनने से गुरू नहीं मिलते।


 || जय गुरुदेव प्रणाम आपको ||

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Tuesday, 8 November 2022

देव दीपावली पर्व ब गुरु पर्व..

 आप सभी जन को देव दीपावली पर्व ब गुरु पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं जी.....




Monday, 31 October 2022

छठ पूजा

 आप सभी जन को Team Astropawankv की तरफ़ से छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.....



Wednesday, 26 October 2022

विश्वकर्म पर्व ब भाई दूज

 आप सभी जन को Team Astropawankv की तरफ़ से विश्वकर्मा दिवस ब भाई दूज पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं....




Monday, 24 October 2022

दिपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

 आप सभी को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 






दीपावली पूजन

 *दीपावली पूजन*

*दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

*दीपावली की सरल एवं सम्पूर्णपूजा विधि-जिसके द्वारा आप स्वयं आराम से माता लक्ष्मी जी का सम्पूर्ण पूजन कर के उनकी सम्पूर्ण कृपा प्राप्त कर सकते है-*


हर वर्ष भारतवर्ष में दिवाली का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. प्रतिवर्ष यह कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है. रावण से  युद्ध के बाद श्रीराम जी जब अयोध्या वापिस आते हैं तब उस दिन कार्तिक माह की अमावस्या थी, उस दिन घर-घर में दिए जलाए गए थे तब से इस त्योहार को दीवाली के रुप में मनाया जाने लगा और समय के साथ और भी बहुत सी बातें इस त्यौहार के साथ जुड़ती चली गई।


“ब्रह्मपुराण” के अनुसार आधी रात तक रहने वाली अमावस्या तिथि ही महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ होती है. यदि अमावस्या आधी रात तक नहीं होती है तब प्रदोष व्यापिनी तिथि लेनी चाहिए. लक्ष्मी पूजा व दीप दानादि के लिए प्रदोषकाल ही विशेष शुभ माने गए हैं।

       

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दीपावली पूजन के लिए पूजा स्थल एक  दिन पहले से सजाना चाहिए पूजन सामग्री भी दिपावली की पूजा शुरू करने से पहले ही एकत्रित कर लें। इसमें अगर माँ के पसंद को ध्यान में रख कर पूजा की जाए तो शुभत्व की वृद्धि होती है। माँ के पसंदीदा रंग लाल, व् गुलाबी है। इसके बाद फूलों की बात करें तो कमल और गुलाब मां लक्ष्मी के प्रिय फूल हैं। पूजा में फलों का भी खास महत्व होता है। फलों में उन्हें श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े पसंद आते हैं। आप इनमें से कोई भी फल पूजा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। अनाज रखना हो तो चावल रखें वहीं मिठाई में मां लक्ष्मी की पसंद शुद्ध केसर से बनी मिठाई या हलवा, शीरा और नैवेद्य है।

माता के स्थान को सुगंधित करने के लिए केवड़ा, गुलाब और चंदन के इत्र का इस्तेमाल करें।


दीये के लिए आप गाय के घी, मूंगफली या तिल्ली के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करते हैं। पूजा के लिए अहम दूसरी चीजों में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र शामिल हैं।


*चौकी सजाना-*


(1) लक्ष्मी, (2) गणेश, (3-4) मिट्टी के दो बड़े दीपक, (5) कलश, जिस पर नारियल रखें, वरुण (6) नवग्रह, (7) षोडशमातृकाएं, (8) कोई प्रतीक, (9) बहीखाता, (10) कलम और दवात, (11) नकदी की संदूक, (12) थालियां, 1, 2, 3, (13) जल का पात्र


सबसे पहले चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजा करने वाले मूर्तियों के सामने की तरफ बैठे। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है। दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अलावा एक दीपक गणेशजी के पास रखें।

       

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मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।


इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचों बीच ॐ लिखें। छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें-


1. ग्यारह दीपक,


2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान,


 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।


इन थालियों के सामने पूजा करने वाला बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।

       

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हर साल दिवाली पूजन में नया सिक्का ले और पुराने सिक्को के साथ इख्ठा रख कर दीपावली पर पूजन करे और पूजन के बाद सभी सिक्को को तिजोरी में रख दे।


*पूजा की सम्पूर्ण एवं संक्षिप्त विधि स्वयं करने के लिए-*


*पवित्रीकरण-*


हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में नीचे दिया गया पवित्रीकरण मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।


शरीर एवं पूजा सामग्री पवित्रीकरण मन्त्र


ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।


यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥


पृथ्वी पवित्रीकरण विनियोग


पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः


कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥


अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-


पृथ्वी पवित्रीकरण मन्त्र


ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।

त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥

पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः


अब आचमन करें-


पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-


ॐ केशवाय नमः


और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-


ॐ नारायणाय नमः


फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-


ॐ वासुदेवाय नमः


   

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इसके बाद संभव हो तो किसी किसी ब्राह्मण द्वारा विधि विधान से पूजन करवाना अति लाभदायक रहेगा। ऐसा संभव ना हो तो सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन कर गणेश जी का ध्यान कर अक्षत पुष्प अर्पित करने के पश्चात दीपक का गंधाक्षत से तिलक कर निम्न मंत्र से पुष्प अर्पण करें।


शुभम करोति कल्याणम,

अरोग्यम धन संपदा,

शत्रु-बुद्धि विनाशायः,

दीपःज्योति नमोस्तुते !


*पूजन हेतु संकल्प -*


इसके बाद बारी आती है संकल्प की। जिसके लिए पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, आदि सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें- ऊं विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ऊं तत्सदद्य श्री पुराणपुरुषोत्तमस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय पराद्र्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे सप्तमे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बुद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गत ब्रह्मवर्तैकदेशे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते : 2070, तमेऽब्दे शोभन नाम संवत्सरे दक्षिणायने/उत्तरायणे हेमंत ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे कार्तिक मासे कृष्ण पक्षे अमावस तिथौ (जो वार हो) रवि वासरे स्वाति नक्षत्रे आयुष्मान योग चतुष्पाद करणादिसत्सुशुभे योग (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया– श्रुतिस्मृत्यो- क्तफलप्राप्तर्थं— निमित्त महागणपति नवग्रहप्रणव सहितं कुलदेवतानां पूजनसहितं स्थिर लक्ष्मी महालक्ष्मी देवी पूजन निमित्तं एतत्सर्वं शुभ-पूजोपचारविधि सम्पादयिष्ये।


*श्री गणेश पूजन-*


किसी भी पूजन की शुरुआत में सर्वप्रथम श्री गणेश को पूजा जाता है। इसलिए सबसे पहले श्री गणेश जी की पूजा करें।

इसके लिए हाथ में पुष्प लेकर गणेश जी का ध्यान करें। मंत्र पढ़े

 – गजाननम्भूतगणादिसेवितं

कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्।

उमासुतं शोक विनाशकारकं

नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।


   

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*गणपति आवाहन:-* ऊं गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ।। इतना कहने के बाद पात्र में अक्षत छोड़ दे।


इसके पश्चात गणेश जी को पंचामृत से स्नान करवाये पंचामृत स्नान के बाद शुद्ध जल से स्नान कराए अर्घा में जल लेकर बोलें- एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम् ऊं गं गणपतये नम:।


रक्त चंदन लगाएं- इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:, इसी प्रकार श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं। इसके पश्चात सिन्दूर चढ़ाएं “इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:। दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को अर्पित करें। उन्हें वस्त्र पहनाएं और कहें – इदं रक्त वस्त्रं ऊं गं गणपतये समर्पयामि।


पूजन के बाद श्री गणेश को प्रसाद अर्पित करें और बोले – इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। मिष्ठान अर्पित करने के लिए मंत्र: इदं शर्करा घृत युक्त नैवेद्यं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं गं गणपतये नम:। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। अब एक फूल लेकर गणपति पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ऊं गं गणपतये नम:


*इसी प्रकार अन्य देवताओं का भी पूजन करें बस जिस देवता की पूजा करनी हो गणेश जी के स्थान पर उस देवता का नाम लें।*


*कलश पूजन-*


इसके लिए लोटे या घड़े पर मोली बांधकर कलश के ऊपर आम के पत्ते रखें। कलश के अंदर सुपारी, दूर्वा, अक्षत व् मुद्रा रखें। कलश के गले में मोली लपेटे। नारियल पर वस्त्र लपेट कर कलश पर रखें। अब हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण देव का कलश में आह्वान करें। ओ३म् त्तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभि:। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयु: प्रमोषी:। (अस्मिन कलशे वरुणं सांगं सपरिवारं सायुध सशक्तिकमावाहयामि, ओ३म्भूर्भुव: स्व:भो वरुण इहागच्छ इहतिष्ठ। स्थापयामि पूजयामि॥)


इसके बाद इस प्रकार श्री गणेश जी की पूजन की है उसी प्रकार वरुण देव की भी पूजा करें। इसके बाद इंद्र और फिर कुबेर जी की पूजा करें। एवं वस्त्र सुगंध अर्पण कर भोग लगाये इसके बाद इसी प्रकार क्रम से कलश का पूजन कर लक्ष्मी पूजन आरम्भ करे

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*माता लक्ष्मी का पूजन प्रारम्भ-*


सर्वप्रथम निम्न मंत्र कहते हुए माँ लक्ष्मी का ध्यान करें।


ॐ या सा पद्मासनस्था,

विपुल-कटि-तटी, पद्म-दलायताक्षी।

गम्भीरावर्त-नाभिः,

स्तन-भर-नमिता, शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया।।

लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणि-गज-खचितैः, स्नापिता हेम-कुम्भैः।

नित्यं सा पद्म-हस्ता, मम वसतु गृहे, सर्व-मांगल्य-युक्ता।।


अब माँ लक्ष्मी की प्रतिष्ठा करें👉 हाथ में अक्षत लेकर मंत्र कहें – “ॐ भूर्भुवः स्वः महालक्ष्मी, इहागच्छ इह तिष्ठ, एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।”


प्रतिष्ठा के बाद स्नान कराएं और मंत्र बोलें – ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः।। इदं रक्त चंदनम् लेपनम् से रक्त चंदन लगाएं। इदं सिन्दूराभरणं से सिन्दूर लगाएं। ‘ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, कमलायै नमो नमः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं फिर माला पहनाएं। अब लक्ष्मी देवी को इदं रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र पहनाएं। इसके बाद मा लक्ष्मी के क्रम से अंगों की पूजा करें।


*माँ लक्ष्मी की अंग पूजा-*


बाएं हाथ में अक्षत लेकर दाएं हाथ से थोड़े थोड़े छोड़ते जाए और मंत्र कहें – ऊं चपलायै नम: पादौ पूजयामि ऊं चंचलायै नम: जानूं पूजयामि, ऊं कमलायै नम: कटि पूजयामि, ऊं कात्यायिन्यै नम: नाभि पूजयामि, ऊं जगन्मातरे नम: जठरं पूजयामि, ऊं विश्ववल्लभायै नम: वक्षस्थल पूजयामि, ऊं कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि, ऊं कमल पत्राक्ष्य नम: नेत्रत्रयं पूजयामि, ऊं श्रियै नम: शिरं: पूजयामि।


*अष्टसिद्धि पूजा-*


अंग पूजन की ही तरह हाथ में अक्षत लेकर मंतोच्चारण करते रहे। मंत्र इस प्रकर है – ऊं अणिम्ने नम:, ओं महिम्ने नम:, ऊं गरिम्णे नम:, ओं लघिम्ने नम:, ऊं प्राप्त्यै नम: ऊं प्राकाम्यै नम:, ऊं ईशितायै नम: ओं वशितायै नम:।

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*अष्टलक्ष्मी पूजन -*


अंग पूजन एवं अष्टसिद्धि पूजा की ही तरह हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें। ऊं आद्ये लक्ष्म्यै नम:, ओं विद्यालक्ष्म्यै नम:, ऊं सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:, ओं अमृत लक्ष्म्यै नम:, ऊं लक्ष्म्यै नम:, ऊं सत्य लक्ष्म्यै नम:, ऊं भोगलक्ष्म्यै नम:, ऊं योग लक्ष्म्यै नम:


*नैवैद्य अर्पण-*


पूजन के बाद देवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें। मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि” बालें। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं महालक्ष्मियै नम:। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि। अब एक फूल लेकर लक्ष्मी देवी पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ऊं महालक्ष्मियै नम:।


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माँ को यथा सामर्थ वस्त्र, आभूषण, नैवेद्य अर्पण कर दक्षिणा चढ़ाए दूध, दही, शहद, देसी घी और गंगाजल मिलकर चरणामृत बनाये और गणेश लक्ष्मी जी के सामने रख दे। इसके बाद 5 तरह के फल, मिठाई खील-पताशे, चीनी के खिलोने लक्ष्मी माता और गणेश जी को चढ़ाये और प्राथना करे की वो हमेशा हमारे घरो में विराजमान रहे। इनके बाद एक थाली में विषम संख्या में दीपक 11,21 अथवा यथा सामर्थ दीप रख कर इनको भी कुंकुम अक्षत से पूजन करे इसके बाद माँ को श्री सूक्त अथवा ललिता सहस्त्रनाम का पाठ सुनाये पाठ के बाद माँ से क्षमा याचना कर माँ लक्ष्मी जी की आरती कर बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के बाद थाली के दीपो को घर में सब जगह रखे। लक्ष्मी-गणेश जी का पूजन करने के बाद, सभी को जो पूजा में शामिल हो, उन्हें खील, पताशे, चावल दे।

सब फिर मिल कर प्राथना करे की माँ लक्ष्मी हमने भोले भाव से आपका पूजन किया है ! उसे स्वीकार करे और गणेशा, माँ सरस्वती और सभी देवताओं सहित हमारे घरो में निवास करे। प्रार्थना करने के बाद जो सामान अपने हाथ में लिया था वो मिटटी के लक्ष्मी गणेश, हटड़ी और जो लक्ष्मी गणेश जी की फोटो लगायी थी उस पर चढ़ा दे।

लक्ष्मी पूजन के बाद आप अपनी तिजोरी की पूजा भी करे रोली को देसी घी में घोल कर स्वस्तिक बनाये और धुप दीप दिखा करे मिठाई का भोग लगाए।

लक्ष्मी माता और सभी भगवानो को आपने अपने घर में आमंत्रित किया है अगर हो सके तो पूजन के बाद शुद्ध बिना लहसुन-प्याज़ का भोजन बना कर गणेश-लक्ष्मी जी सहित सबको भोग लगाए। दीपावली पूजन के बाद आप मंदिर, गुरद्वारे और चौराहे में भी दीपक और मोमबतियां जलाएं।

रात को सोने से पहले पूजा स्थल पर मिटटी का चार मुह वाला दिया सरसो के तेल से भर कर जगा दे और उसमे इतना तेल हो की वो सुबह तक जल सके।


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*माँ लक्ष्मी जी की आरती*



ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुम को निस दिन सेवत, मैयाजी को निस दिन सेवत

हर विष्णु विधाता .

ॐ जय लक्ष्मी माता ...


उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता

ओ मैया तुम ही जग माता .

सूर्य चन्द्र माँ ध्यावत, नारद ऋषि गाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


दुर्गा रूप निरन्जनि, सुख सम्पति दाता

ओ मैया सुख सम्पति दाता .

जो कोई तुम को ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता

ओ मैया तुम ही शुभ दाता .

कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भव निधि की दाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


जिस घर तुम रहती तहँ सब सद्गुण आता

ओ मैया सब सद्गुण आता .

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता

ओ मैया वस्त्र न कोई पाता .

ख़ान पान का वैभव, सब तुम से आता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता

ओ मैया क्षीरोदधि जाता .

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


महा लक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता

ओ मैया जो कोई जन गाता .

उर आनंद समाता, पाप उतर जाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


*सभी मित्रो को प्रकाश पर्व की ढेरों शुभकामनाये।*

🙏🙏

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Saturday, 22 October 2022

धनतेरस पर्व

 आप सभी जन को Team Astropawankv की तरफ़ से धनतेरस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं....







धनतेरस पर्व

 *धनतेरस के  पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं*

        

 *धनतेरस के उपाय ब धनतेरस के दिन क्या करे / क्या खरीदें/ क्या ना खरीदें*


 स्कंद महापुराण में बताया गया है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी को प्रदोषकाल में अपने घर के दरवाजे के बाहर यमराज के लिए दिया(दीप) जलाकर रखने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।


धनतेरस के दिन विधि पूर्वक से देवी लक्ष्मी जी और धन के देव कुबेर जी और धनवंतरी जी की पूजन अर्चन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रदोषकाल में माँ लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना करने से लक्ष्मी जी घर में ही निवास कर जाती हैं।


 दीपदान के समय इस मंत्र का जाप करते रहना चाहिए :-


*मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।*

*त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यज: प्रीयतामिति॥*


इस मंत्र का अर्थ है:


त्रयोदशी को दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दण्ड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनन्दन यम प्रसन्न हों। इस मंत्र के द्वारा लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होती हैं।


✅ सोने चांदी के सिक्कों के अलावा इस दिन निम्न चीजें का खरीदना शुभ माना जाता है:


🔵 पीतल के बर्तन का बहुत महत्व है।

🔵 चांदी के लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति

🔵 कुबेरजी का  यंत्र

🔵 लक्ष्मी या श्री यंत्र

🔵 गोमती चक्र

🔵 सात मुखी रुद्राक्ष

🔵 धनिये के बीज

🔵 कौड़ी और कमल गट्टा

🔵 झाड़ू


 *क्या ना खरीदें*


🔴 एल्युमिनियम के बर्तन :


एल्युमिनियम पर राहु का प्रभुत्व होता है, सभी शुभ फल देने वाले गृह इससे प्रभावित होते है, यही कारण है की ज्योतिष में और पूजा पाठ में भी एल्युमिनियम का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसलिए हो सके तो धनतेरस को एल्युमिनियम का कोई भी सामान खरीदकर घर नहीं लाना चाहिए।


🔴 लोहा या लोहे से बनी वस्तुएं:

धनतेरस पर लोहे का सामान नहीं खरीदना चाहिए, अगर आपको खरीदना ही है तो एक दिन पहले ही खरीद लेना चाहिए।


🔴 पानी का खाली बर्तन: अगर आप पानी का कोई बर्तन खरीदतें है तो ध्यान रखें की इसे खाली ही घर में ना लेकर आएं, इसमें थोड़ा पानी भरकर ही घर में प्रवेश करें। क्योंकि भगवान् धन्वन्तरि भी कलश में अमृत लेकर पैदा हुए थे इसीलिए बर्तन को खाली घर में नहीं लाने की मान्यता है।


🔴 नुकीली वस्तुएं : धनतेरस के दिन नुकीली चीज़ें जैसे चाक़ू, कैंची, छुरी आदि को घर लाने से बचना चाहिए।


🔴 गाड़ी:  हालांकि धनतेरस पर बहुत से लोग गाड़ी खरीदने को प्राथमिकता देते है लेकिन मान्यता है की यदि आप धनतेरस पर गाड़ी खरीद रहे है तो उसका भुगतान उसी दिन ना करें, गाड़ी का पेमेंट एक दिन पहले ही कर दें।


🔴 तेल: त्योंहार के दिन घी तेल का बहुत महत्व और उपयोग होता है, लेकिन धनतेरस को घी या तेल घर में नहीं लाना चाहिए, हो सके तो एक दिन पहले तक ही तेल और घी को पहले से ही ला करके रखना चाहिए।


🔴 कांच का सामान: शीशे का सम्बन्ध भी बुध राहु से होता है, इसलिए धनतेरस को शीशा नहीं खरीदना चाहिए, अगर खरीदना बहुत ही जरुरी हो तो .. तो ध्यान रहे वह धुंधला या पारदर्शी नहीं होना चाहिए... कोशिश यही रखें कि न खरीदा जाए


🔴 उपहार: किसी को देने के लिए कोई गिफ्ट / उपहार भी इस दिन नहीं खरीदें।



*धनतेरस के दिन/मूहूर्त*


 इस बार  धनतेरस शनिवार को सायंकाल को 06:30P.M. से शुरू होकर रविवार सांयकाल तक है  


*पूजन मूहूर्त*


इस बार धनतेरस पूजन मूहूर्त 22/10/2022 शाम को 07:02 बजे से लेकर 08:21 रात तक है




स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान धन्वंतरि जी की पूजा कर स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करें ।


यदि धन्वंतरि का चित्र उपलब्ध न हो तो भगवान विष्णुजी की प्रतिमा में धन्वंतरि जी की भावना कर उनकी पूजा कर सकते हैं ।इस दिन भगवान सूर्य को निरोगता की कामना कर लाल फूल डालकर अर्घ्य दें ।सायंकाल घर के बाहर चावल, गेहूँ व गुड़ रखें उसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े होकर मै यमराज के निमित्त दीपदान कर रहा हूँ, भगवान देवी श्यामा सहित मुझ पर प्रसन्न हो ऐसा बोलकर उस अनाज के ऊपर यमराज के निमित्त दीपक जलायें और निम्नोत्क मंत्र का उच्चारण करते हुए गंध-पुष्यादि से पूजन करें -

मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह ।

त्रयोदश्यां दीपदानात्सुर्यज: प्रीयतामिति।।(पद्मपुराण)



*लक्ष्मी प्राप्ति हेतु लक्ष्मीजी की पूजा करें*



*ॐ नम: भाग्यलक्ष्मी च विद्महे ।अष्टलक्ष्मी च धीमहि।तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ।*


धनतेरस के दिन यदि भगवान के नाम से घर के लिए कोई सामान बर्तन खरीद कर लाएं तो उसमे मोर पंख या पंच मेवा  अवश्य रख दे l


यह बर्तन तीन दिन पुजा स्थल मे रख दें

बर्तन  आप  सोना, चांदी तांबे , पीतल,   या शुद्ध मिट्टी से बना हुआ ले सकते है l

 

यह उपाय करने से मां लक्ष्मी जी के साथ कुबेर जी, धनवंतरी जी का आगमन हो कर स्थाई रूप से  आपके घर मे निवास करते है l


 *राशी के उपाय*


इस दिन यदि  हम हमारे राशी के देवता , ईष्ट देवता , कुल देवता को प्रसन्न कर के उनका आशिर्वाद प्राप्त करे तो हमारे कई प्रकार के कष्ट नष्ट हो सकते हैं और हम धन धान्य का सुख प्राप्त कर सकते l  पूजन के साथ मे अपनी राशि के अनुसार यह उपाय भी  अवश्य करे लाभदायक होगा.....


*मेष राशी*



धनतेरस के दिन तांबे या पीतल का बर्तन  मे पीला या लाल वस्त्र या फिर रूमाल खरीद कर बर्तन के अंदर डाल कर घर  के अंदर ले आये l


*वृषभ राशी*


चांदी का कलश या बर्तन  खरिदकर उसमे चावल ले आये l


*मिथुन राशी*


तांबे के कलश या बर्तन मे मूंग की दाल या लाल रंग की दाल भर कर घर ले आये  l


*कर्क राशी*



चांदी के बर्तन मे चावल और दुध खरदिकर ले आये l


*सिंह राशी*


तांबे के बर्तन खरीद कर उसमे मे गुड ले आये l


*कन्या राशी*

पीतल के बर्तन मे लाल रंग कि दाल और हरे रंग की दाल ले आये l


*तुला राशी*



चांदी के बर्तन मे चीनी (शुगर) और चावल मिक्स करके ले आये  l


*वृश्चिक राशी*


तांबे के बर्तन मे गुड भरकर ले आये l


*धनु राशी*


सोने या पीतल कि वस्तु मे चने कि दाल ले आये l


*मकर राशी*


लोहे कि वस्तु मे काली दाल ले आये l

जैसे उडद दाल


*कुंभ राशी*


एक दिन पूर्व लोहे का छल्ला खरीद कर ले आये और धनतेरस को चने कि दाल 800 ग्राम खरीदे।


*मीन राशी*

सोना या पितल के बर्तन मे चने कि दाल और नारियल पानी वाला घर ले आये l


तो यह उपाय जरूर करीये काफी लाभ होगा l

विशेष दिनो मे विशेष उपाये करने से

हमे उस प्रकार की उर्जा प्राप्त होती है l यह उपाय कई अधिक शक्तीशाली होते है ।इस रात्रि माता लक्ष्मी , कुबेर देवता और धनवंतरी के मंत्र भी दुगा

मंत्रो से हमारी पीडा नष्ट होके लक्ष्मी कि विशेष कृपा प्राप्त होती l


यदि आप किसी कारण वश बर्तन या सामान खरीद नही सकते ,  पैसो की कमी आड़े आती है या कोई भी कारण है  तो आप केवल इतना ही उपाय कर सकते है कि आप धनतेरस के दिन बाजार से छोटे छोटे मिट्टी के बर्तन खरीदकर ले आये

साथ मे मोर पंख मिले तो खरीद कर भी ला सकते है 

बर्तन और मोर पंख को पुजा स्थल मे तीन दिन के लिए रख दे ब पूजन अर्चना करें। आपको लाभ प्राप्त होगा


*अब क्या ना करे ।*


इस दिन प्लास्टीक फाईबर स्टील कांच की कोई भी वस्तु ना खरिदे ।

जैसे T.V ,A C , फ्रिज , वॉशिंग मशीन  इत्यादि..यहा तक कि पेन भी ना खरीदे l किसी से भी झगड़ा बहस न करें कर्जा इत्यादि न लें। 


🙏🙏

*Verma's*

*Scientific Astrology & Vastu*

 *Research Astrologer's Pawan Kumar Verma ( B.A.,D.P.I.,LL.B.) & Monita Verma Astro Research Center Ludhiana Punjab Bharat *Phone +919417311379*

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Saturday, 15 October 2022

शनि और भाव 4

 चतुर्थ भाव का कारक चंद्रमा ग्रह होता है और चंद्रमा माता का कारक भी है  और आपके मन का भी कारक है और आपकी प्रतिदिन की कमाई का भी..... चंद्र यानि मां के सामने  पापी ग्रह भी शांत रहेंगे और तब तक शांत रहेंगे  जब तक कि इनको किसी के द्वारा उकसाया/ भड़काया ना जाये .... बच्चा कितना भी बुरा क्यों न हो मा के डाटने से शांत ही रहता है उसे मा का डर रहता है  ... इसलिए कोशिश करें कि अपनी मां के साथ बना कर रखें कभी गुस्सा लड़ाई- झगड़ा न करें और अपने माता पिता का आशीर्वाद समय समय पर लेते रहें उनकी सेवा करते रहें।..... शनि ग्रह की ऐसी चीजें जो तरल पदार्थ के रूप में हों और वो हमारे शरीर के लिए लाभदायक हों उनका सेवन विधि पूर्वक से सेवन करें तो लाभ प्राप्त लिया जा सकता है... और साथ में इस बात का भी ध्यान अवश्य रखें कि घर में वास्तु दोष न हों  घर को वास्तु दोष से मुक्त रखें/ करवाएं.... अपनी जन्मकुंडली को किसी ज्योतिष के अच्छे विद्वान को दिखा कर उनसे उपाय/परहेज़ अवश्य लें.............

आज के लिए इतना ही काफी .....बाकी अगली बार....


*Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone number..9417311379. www astropawankv.com*

Thursday, 13 October 2022

करवा चतुर्थी


*देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि में परमं सुखम्।*

*रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।*

 *भावार्थ* - अखण्ड सुहागको देनेवाला *करवाचौथ* पति और पत्नी दोनोंके लिये नवप्रणय–निवेदन और एक–दूसरेके प्रति अपार प्रेम, त्याग एवं उत्सर्गकी चेतना लेकर आता है। इस दिन स्त्रियाँ पूर्ण सुहागिनका रूप धारणकर वस्त्राभूषणोंको पहनकर भगवान् रजनीशसे अपने अखण्ड सुहागकी प्रार्थना करती हैं।

*अखण्ड सौभाग्यव्रत करवा चतुर्थी पर हार्दिक शुभकामनाएं




            

Wednesday, 5 October 2022

विजयदशमी

 विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं...





Monday, 3 October 2022

नवरात्रि पर्व का अष्टम दिवस

 नवरात्रि पर्व के अष्टम दिवस पर मां महागौरी जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए.....





Sunday, 2 October 2022

नवरात्रि पर्व का सप्तम दिवस

 नवरात्रि पर्व के सप्तम दिवस पर मां कालरात्रि जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए....





Friday, 30 September 2022

नवरात्रि पर्व का पंचम दिन

 नवरात्रि पर्व के पंचम दिवस पर मां सकंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है......




Thursday, 29 September 2022

नवरात्रि पर्व का चतुर्थ दिन

 नवरात्रि पर्व के चौथे दिन मां कुष्मांडा देवी की पूजा अर्चना करते हैं




Wednesday, 28 September 2022

नवरात्रि पर्व का तीसरा दिन

 नवरात्रि पर्व के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा देवी की पूजा अर्चना करते हैं




Monday, 26 September 2022

नवरात्रों की शुभकामनाएं

 आप सभी जन को अश्विन नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं....




Sunday, 25 September 2022

आज पितृ विसर्जन अमावस्या

 आज पितृ विसर्जन अमावस्या 

          ************

घर को धोकर सूर्यास्त के समय एक दीपक जलाकर घर के बाहर या फिर पीपल वृक्ष के नीचे रख दें। इसका भाव यह है कि पितृगण विदा होकर जब अपने लोक को वापिस लौटते है तो उन्हे रास्ता साफ दिखाई देता है। और इस दिन शाम को दीपक जलाकर पूड़ी पकवान आदि खाद्य पदार्थ दरवाजे पर रखे जाते हैं। जिसका अर्थ है कि पितृ जाते समय भूखे न रह जायें। वे प्रसन्नता पूर्वक अपने स्थान पर चले जाए।  दीपक जलाते समय हमें यह प्रार्थना करनी चाहिए--!


सेवा काछु कीन्ही नही,दिया न काछु ध्यान।

 गल्ती सब माफ करो, हमे जान अज्ञान।


दीप ज्योति हमने करी,लीजो पंथ निहार।

 जो कुछ हमसे बन पड़ा, दिन्हो तुम्हे आहार।


प्रणाम पुनि पुनि करु,रखियो वंश को ध्यान।

 आशिर्वाद सदा देते रहो,फूले फले परिवार।


      || समस्त पितृ देवो को प्रणाम ||

                 Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone..9417311379. www.astropawankv.com

Wednesday, 14 September 2022

पितृ दोष...

 *||  पितृ दोष क्या होता है ?||*

          ************

     *ध्यान दें*


 हमारे ये ही पूर्वज सूक्ष्म व्यापक शरीर से अपने परिवार को जब देखते हैं,और महसूस करते हैं कि हमारे परिवार के लोग ना तो हमारे प्रति श्रद्धा रखते हैं ,और न ही इन्हें कोई प्यार या स्नेह है और ना ही किसी भी अवसर पर ये हमको याद करते हैं,ना ही अपने ऋण चुकाने का प्रयास ही करते हैं तो ये आत्माएं दुखी होकर अपने वंशजों को श्राप दे देती हैं,जिसे "पितृ- दोष" कहा जाता है।


पितृ दोष एक अदृश्य बाधा है .ये बाधा पितरों द्वारा रुष्ट होने के कारण होती है पितरों के रुष्ट होने के बहुत से कारण हो सकते हैं ,आपके आचरण से,किसी परिजन द्वारा की गयी गलती से ,श्राद्ध आदि कर्म ना करने से अंत्येष्टि कर्म आदि में हुई किसी त्रुटि के कारण भी हो सकता है।


पितृ दोष दो प्रकार से 

     प्रभावित करता है -


1-अधोगति वाले पितरों के कारण

    2-उर्ध्वगति वाले पितरों के कारण


1-अधोगति वाले पितरों के दोषों का मुख्य कारण परिजनों द्वारा किया गया गलत आचरण,की अतृप्त इच्छाएं ,जायदाद के प्रति मोह और उसका गलत लोगों द्वारा उपभोग होने पर,विवाहादि में परिजनों द्वारा गलत निर्णय।परिवार के किसी प्रियजन को अकारण कष्ट देने पर पितर क्रुद्ध हो जाते हैं ,परिवार जनों को श्राप दे देते हैं और अपनी शक्ति से नकारात्मक फल प्रदान करते हैं।


2- उर्ध्व गति वाले पितर सामान्यतः पितृदोष उत्पन्न नहीं करते ,परन्तु उनका किसी भी रूप में अपमान होने पर अथवा परिवार के पारंपरिक रीति रिवाजों का निर्वहन नहीं करने पर वह पितृदोष उत्पन्न करते हैं।


इनके द्वारा उत्पन्न पितृदोष से व्यक्ति की भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति बिलकुल बाधित हो जाती है , और बेऔलाद होना या हो जाना , परिवार में केवल बेटियां ही औलाद के रूप में पैदा होना इत्यादि.... फिर चाहे कितने भी प्रयास क्यों ना किये जाएँ ,कितने भी पूजा पाठ क्यों ना किये जाएँ,उनका कोई भी कार्य ये पितृदोष सफल नहीं होने देता। पितृ दोष निवारण के लिए सबसे पहले ये जानना ज़रूरी होता है कि किस ग्रह के कारण और किस प्रकार का पितृ दोष उत्पन्न हो रहा है और जन्मकुंडली में कौन -2 से ग्रह योग या दोष बन रहे हैं ?


       || पितृ देवाय नमः ||

             ✍

*Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone..9417311379. www.astropawankv.com*

Friday, 9 September 2022

आज करें विसर्जन......

 आज....


विसर्जन कीजिये *गुस्से* का,

विसर्जन कीजिये *द्वेष* का,

विसर्जन कीजिये *लोभ* का,

विसर्जन कीजिये *मोह* का,

विसर्जन कीजिये *आलस* का,

विसर्जन कीजिये *चिंता* का,

विसर्जन कीजिये *निराशा* का,

विसर्जन कीजिए *दुराचार* का,

विसर्जन कीजिए *अहम और गुरुर* का,

विसर्जन कीजिये *नकारात्मक विचारों* का,

विसर्जन कीजिये *बुरी आदतों का*,


निसंदेह....सभी विघ्न दूर होंगे.


🙏🏻🌺 गणपति बप्पा मोरिया

Verma's Scientific Astrology and Vastu Research Center Ludhiana Punjab Bharat Phone..9417311379.  www astropawankv.com



Monday, 5 September 2022

शिक्षक दिवस....

 शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं








Monday, 15 August 2022

Happy Independence day

 From the whole Team of Astropawankv wish you all a very Happy Independence Day....


|| Verma's Scientific Astrology & Vastu Research Center ||

Ludhiana, Punjab, Bharat.


        Astropawankv


|| Let The Stars Guide You ||

Friday, 22 July 2022

शिव को शंख से जल.....


*शिव को शंख से जल क्यों नहीं चढ़ाया जाता?*

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शिवपुराण के अनुसार शंखचूड नाम का महापराक्रमी दैत्य हुआ। शंखचूड दैत्यराज दंभ का पुत्र था। दैत्यराज दंभ को जब बहुत समय तक कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई तब उसने भगवान विष्णु के लिए कठिन तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर विष्णु प्रकट हुए। विष्णुजी ने वर मांगने के लिए कहा तब दंभ ने तीनों लोको के लिए अजेय एक महापराक्रमी पुत्र का वर मांगा। श्रीहरि तथास्तु बोलकर अंतर्ध्यान हो गए। तब दंभ के यहां एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम शंखचूड़ पड़ा। शंखचुड ने पुष्कर में ब्रह्माजी के निमित्त घोर तपस्या की और उन्हें प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मा ने वर मांगने के लिए कहा तब शंखचूड ने वर मांगा कि वो देवताओं के लिए अजेय हो जाए। ब्रह्माजी ने तथास्तु बोला और उसे श्रीकृष्ण कवच दिया। 


साथ ही ब्रह्मा ने शंखचूड को धर्मध्वज की कन्या तुलसी से विवाह करने की आज्ञा दी। फिर वे अंतर्ध्यान हो गए।ब्रह्मा की आज्ञा से तुलसी और शंखचूड का विवाह हो गया। ब्रह्मा और विष्णु के वरदान के मद में चूर दैत्यराज शंखचूड ने तीनों लोकों पर स्वामित्व स्थापित कर लिया। देवताओं ने त्रस्त होकर विष्णु से मदद मांगी परंतु उन्होंने खुद दंभ को ऐसे पुत्र का वरदान दिया था अत: उन्होंने शिव से प्रार्थना की। तब शिव ने देवताओं के दुख दूर करने का निश्चय किया और वे चल दिए। परंतु श्रीकृष्ण कवच और तुलसी के पतिव्रत धर्म की वजह से शिवजी भी उसका वध करने में सफल नहीं हो पा रहे थे तब श्री विष्णु ने ब्राह्मण रूप बनाकर दैत्यराज से उसका श्रीकृष्ण कवच दान में ले लिया। 


इसके बाद शंखचूड़ का रूप धारण कर तुलसी के शील का हरण कर लिया। अब शिव ने शंखचूड़ को अपने त्रिशुल से भस्म कर दिया और उसकी हड्डियों से शंख का जन्म हुआ। चूंकि शंखचूड़ विष्णु भक्त था अत: लक्ष्मी विष्णु को शंख का जल अति प्रिय है और सभी देवताओं को शंख से जल चढ़ाने का विधान है। परंतु शिव ने चूंकि उसका वध किया था अत: शंख का जल शिव को निषेध बताया गया है। इसी वजह से शिवजी को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता है।


      || हर हर महादेव शंभो ||

               ✍

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Wednesday, 13 July 2022

गुरू पूर्णिमा पर्व ..

 *गुरू पूर्णिमा पर्व*


इस वर्ष गुरु पूर्णिमा  का पर्व 13 जुलाई को मनाया जायेगा।

  गुरु पूर्णिमा कब होती है।

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             आषाढ मास की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहा जाता है।

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             चातुर्मास के चार मास तक प्रवाचक,  साधु संत एक ही स्थान पर रह कर ज्ञान गंगा बहाते है। चातुर्मास के चार मास मौसम के अनुसार भी सर्वश्रेष्ठ होते है  अध्यन के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माने गये है। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता और फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है उसी प्रकार गुरु चरणो मे  उपस्थित साधक को ग्यान शक्ति   और भक्ति प्राप्त होती है।

गुरु पूर्णिमा किस के नाम पर मनायी जाती है।

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         गुरु पूर्णिमा गुरु की पूजा अर्चना के लिए विशेषतः मनायी जाती है। महाभारत के रचियता कृष्ण द्वैपायन का जन्म गुरु पूर्णिमा के दिन हुवा था। कृष्ण द्वैपायन संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित थे और चारो वेदो के रचियता भी कृष्ण द्वैपायन ही थे इस लिए इनको में वेद व्यास भी कहा जाता है। कृष्ण द्वैपायन के सम्मान में इस पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। भक्ति काल में संत कबीर के शिष्य श्री घासी दास का जन्म भी इसी दिन हुवा था।

शास्त्रो के अनुसार गुरु का अर्थ।

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                शास्त्रो के अनुसार गु का अर्थ- अंधकार मूल अज्ञान और रु का अर्थ- निरोधक अर्थात अंधकार हटाकर प्रकाश की ओर लेजाने वाले को ही गुरु कहते है।

 गुरु का महत्व।

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             गुरु के विना ज्ञान नही मिल सकता है। गुरु को पाने के लिए भी उतनी ही तपस्या करनी पडती है जितनी ईश्वर को पाने के लिए।  सच्चा गुरु ही हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ला सकता है। संत कबीर दास जी ने गुरु को ईश्वर से भी बडा निम्न दोहे  में बताया है।

*"गुरु गोबिन्द दोऊ खडे, काके लागू पाय।

बलिहारी गुरु आपने, गोबिन्द दिये बताय।।"*

🙏🙏

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Tuesday, 7 June 2022

गुरु राहु

 *गुरु-राहु*

की युति या इनका दृष्टि संबंध

इंसान के विवेक को नष्ट कर देता है उसे बेहद गुस्से वाला विवेक हीन अपने आप को सर्व सब मानने वाला मूर्खता पूर्ण / निंदित कार्य करने पर मजबूर करने वाला बना देता है । शायद यही कारण रावण  जैसे एक पूर्ण ज्ञानवान व्यक्ति के सर्वनाश का रहा होगा।—

-यदि राहु बहुत शक्तिशाली नहीं हुए परन्तु गुरू से युति है तो इससे कुछ हीन स्थिति नजर में आती है। इसमें अधीनस्थ अपने

अधिकारी का मान नहीं करते ओर उनसे निंदित होते रहते है उन्हें अपने कार्य का मान सम्मान नहीं मिलता इत्यादि... गुरू-शिष्य में विवाद मिलते हैं। ......शोध सामग्री / ज्ञान की चोरी इत्यादि या उसके प्रयोग के उदाहरण मिलते हैं,धोखा-फरेब ओर झूठ  यहां खूब देखने को मिलेगा ।


परन्तु राहु और गुरू युति में यदि गुरू बलवान हुए तो गुरू अत्यधिक

समर्थ सिद्ध होते हैं और शिष्यों को मार्गदर्शन देकर उनसे बहुत बडे़ कार्य या शोध करवाने में समर्थ हो जाते हैं। शिष्य भी यदि कोई ऎसा अनुसंधान करते हैं जिनके अन्तर्गत गुरू के द्वारा दिये गये सिद्धान्तों में ही शोधन सम्भव हो जाए तो वे गुरू की आज्ञा लेते हैं या गुरू के आशीर्वाद से ऎसा करते हैं। यह सर्वश्रेष्ठ स्थिति हैऔर मेरा मानना है कि ऎसी स्थिति में उसे गुरू चाण्डाल

योग नहीं कहा जाना चाहिए बल्कि किसी अन्य योग का नाम दिया जा सकता है परन्तु उस सीमा रेखा को पहचानना बहुत कठिन कार्य है जब गुरूचाण्डाल योग में राहु का प्रभाव कम हो जाता है और गुरू

का प्रभाव बढ़ने लगता है। राहु अत्यन्त शक्तिशाली हैं और इनका नैसर्गिक बल सर्वाधिक है तथा बहुत कम प्रतिशत में गुरू

का प्रभाव राहु के प्रभाव को कम कर पाता है। इस योग का सर्वाधिक असर उन मामलों में देखा जा सकता है जब दो अन्य भावों में बैठे हुए राहु और गुरू एक दूसरे पर प्रभाव डालते हैं।

अशुभता का नियंत्रण-गुरु चांडाल योग के जातक के जीवन

पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ रहा हो उसे नियंत्रित करने के

लिए जातक को भगवान शिव की आराधना और गुरु-राहु

से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।

🙏🙏

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Tuesday, 17 May 2022

भगवान जगन्नाथ मंदिर

 *सोचने पर मजबूर कर देते हैं भगवान जगन्नाथ मंदिर के ये आश्चर्य*


*उड़िसा राज्य के पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर देश ही नहीं पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, और यहां से निकलने वाली रथयात्रा में शामिल होने के लिए दुनियां भर से श्रद्धालु आते हैं । लेकिन इस मंदिर की खास बात यह हैं कि मं‍दिर का आर्किटेक्ट इतना भव्य है कि दूर-दूर के वास्तु विशेषज्ञ इस पर रिसर्च करने के लिए आते हैं, यहां से जुड़ी कुछ ऐसी आश्चर्यजनक बाते हैं जिसे देखकर कोई भी इसके बारे में सोचने के लिए मजबूर हो जाता हैं, कि आखिर ऐसा होता है तो कैसे । जानिए कुछ आश्चर्यजनक बातें ।*


*1- भगवान जगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज (झडा) सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है ।*


*2- जगन्नाथ पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा ।*


*3- यहां सामान्य दिनों के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है ।*


*4- आज तक इस मंदिर के ऊपर से कोई भी पक्षी या विमानों को उड़ते हुए नहीं देखा गया ।*


*5- इस मंदिर के मुख्य गुंबद की छाया दिन में किसी भी समय दिखाई ही नहीं देती ।*


*6- सबसे बड़ा चमत्कार इस मंदिर का यह है कि मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन पदार्थ की मात्रा पूरे साल भर के लिए रहती है, प्रसाद की एक बूंद भी व्यर्थ नहीं जाती, जितना प्रसाद बनता हैं उसे लाखों श्रद्धालुओं के खाने के बाद भी मंदिर बंद होने के समय तक सबको मिल भी जाता हैं और बचता भी नहीं ।*


*7- मंदिर की रसोई में बनने वाले प्रसाद को पकाने के लिए 7 बर्तनों को एक दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, और इन्हें कुछ लकड़ियों पर ही पकाया जाता है, यहां भी चमत्कार दिखने को मिलता क्योंकि जिस बर्तन को सबसे ऊपर रखा जाता हैं उसका प्रसाद सबसे पहले पक जाता हैं । फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद एक बर्तन का प्रसाद पकते जाता हैं ।*


*8- मंदिर के सिंहद्वार में पहला कदम रखते ही समुद्र से निकलने वाली किसी भी प्रकार की ध्वनि को नहीं सुना जा सकता ।*


*9- इस मंदिर का रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर बताया जाता हैं ।*


*10- प्रतिदिन शाम के समय मंदिर के ऊपर लगे ध्वज को मनुष्य के द्वारा उल्टा चढ़कर ही बदला जाता है ।*



*11-भगवान जगन्नाथ मंदिर का कुल क्षेत्रफल 4 लाख वर्गफुट में है ।*


*12- इस मंदिर की ऊंचाई कुल 214 फुट है ।*


*13- दुनिया की सबसे बड़े रसोईघर में भगवान जगन्नाथ के भोग के लिए बनने वाले महाप्रसाद को बनाने के लिए कुल 500 रसोइयां एवं उनके 300 सहायक सहयोगी एक साथ काम करते हैं ।सबसे बड़ी बात यह हैं कि ये सारा महाप्रसाद आज भी मिट्टी के बर्तनों में ही पकाया जाता है ।*


     *||जय जगन्नाथ स्वामी||*

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Tuesday, 3 May 2022

अक्षय तृतीया

 *|| महत्व अक्षय तृतीया का ||*

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*सर्वत्र शुक्ल पुष्पाणि प्रशस्तानि सदार्चने।*

*दानकाले च सर्वत्र मंत्र मेत मुदीरयेत्॥*


*अर्थात सभी महीनों की तृतीया में सफेद पुष्प से किया गया पूजन प्रशंसनीय माना गया है। ऐसी भी मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर अपने अच्छे आचरण और सद्गुणों से दूसरों का आशीर्वाद लेना अक्षय रहता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिन किया गया आचरण और सत्कर्म अक्षय रहता है।*

 *सायद आपके संज्ञान मे न हो*

*कथा के अनुसार इसी द‍िन भगीरथ के प्रयासों से 👉देवी गंगा धरती पर अवतर‍ित हुई थीं। इसके अलावा इस दिन देवी 👉अन्‍नपूर्णा का भी जन्‍मदिन मनाया जाता है। मान्‍यता है कि इस द‍िन जो भी शुभ कार्य किया जाता है उसमें वृद्धि होती है। किसी नए कार्य को शुरू करने से उसमें सफलता और अपार सुख-संपदा की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस द‍िन पर‍िणय सूत्र में बंधे दंपत्तियों का दांपत्‍य जीवन अत्‍यंत प्रेम भरा होता है।*


*अक्षय तृतीया की पौराणिक कथा*

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*अक्षय तृतीया के द‍िन मां लक्ष्‍मी और व‍िष्‍णुजी की पूजा के बाद पौराणिक कथा पढ़नी चाहिए। यह कथा इस प्रकार है कि एक धर्मदास नाम के व्‍यक्ति ने अक्षय तृतीया का व्रत किया। इसके बाद 👉ब्राह्मण को दान में पंखा, जौ, नमक, गेहूं, गुड़, घी, सोना और दही द‍िया। यह सब देखकर उसकी पत्‍नी को बिल्‍कुल अच्‍छा नहीं लगा। उसने अपने पति को रोकने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह नहीं मानें। हर साल वह पूरी श्रद्धा और आस्‍था से अक्षय तृतीया का व्रत करते थे।*


*बीमारी में भी करते रहे दान-पुण्‍य*

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*धर्मदास अपने नाम की ही तरह थे। बुढ़ापे और बीमारी की स्थिति में भी वह अक्षय तृतीया के द‍िन पूजा-पाठ और दान-पुण्‍य का कार्य करते रहे। इसी के पुण्‍य-प्रताप से उन्‍होंने अगले जन्‍म में 👉राजा कुशावती के रूप में जन्‍म लिया। अक्षय तृतीया व्रत के प्रभाव से राजा के राज्‍य में किसी भी तरह की कमी नहीं थी। इसके अलावा वह राजा आजीवन अक्षय तृतीया का व्रत और दान-पुण्‍य करते रहे।*


*इसलिए है अक्षय-तृतीया पर दान का महत्‍व-*

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*अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इस तिथि पर कई ऐसी घटनाएं घटित हुईं। जो इस तिथ‍ि को और भी खास बना देती हैं। इस द‍िन किए गए दान का महत्‍व बढ़ा देती हैं। कथा के अनुसार द्वापर युग में महाभारत काल में जिस दिन👉 दु:शासन ने द्रौपदी का चीर हरण किया था, उस दिन अक्षय तृतीया तिथि थी। उस दिन द्रौपदी की लाज बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को👉 अक्षय चीर प्रदान किया था।*


*इसी दिन युध‍िष्ठिर को मिला था यह पात्र-*

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*कथाओं के अनुसार अक्षय तृतीया पर ही 👉युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी। इस पात्र की यह व‍िशेषता थी कि इसका भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। इसी पात्र की सहायता से युधिष्ठिर अपने राज्य के भूखे और गरीब लोगों को भोजन उपलब्ध कराते थे। 👉भविष्य पुराण में अक्षय पात्र का संबंध स्थाली दान व्रत से भी बताया गया है।*


*अक्षय तृतीया से कृष्‍ण-सुदामा का भी है संबंध-*

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*कहते हैं कि जिस दिन सुदामा अपने मित्र भगवान कृष्ण से मिलने गए थे, उस दिन 👉अक्षय तृतीया तिथि थी। सुदामा के पास कृष्ण को भेंट करने के लिए चावल के मात्र कुछ मुट्ठी भर दानें ही थे, जिन्हें उन्होंने श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। उनके इस भाव के कारण कान्हा ने उनकी झोंपड़ी को महल में बदल दिया।*


  *|| भगवान परशुराम जी की जय हो ||*

🙏🙏

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Saturday, 30 April 2022

अमावस्या

 *||शनिचरी अमावस्या ||*

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*नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।*

*नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय * वै नम: ।।*


*हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की अमावस्या तिथि शनिवार, 30 अप्रैल को है। शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण इसे शनि अमावस्या या शनिश्वरी अमावस्या भी कहते हैं। शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा आराधना का विशेष महत्व होता है। इस दिन शनिदोष को खत्म करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं।*


*इस बार शनि अमावस्या पर साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। भारत में सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जिस कारण से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।*


*शनिश्चरी अमावस्या का महत्व जानें रिसर्च एस्ट्रोलॉजर पवन कुमार वर्मा लुधियाना पंजाब जी से.....*

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*शनि ग्रह की शांति :- शनिवार के दिन अमावस्या की तिथि पड़ने के कारण इस दिन शनि देव की पूजा करने से विशेष शांति होती है। जिन लोगों के जीवन में शनि से जुड़ी कोई परेशानी आ रही है वे इस दिन विधि पूर्वक शनिदेव का उपाय करें। बहुत लाभ होता है।*


*शनि मंदिर जाएं:-*

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*इस दिन शाम के समय शनि मंदिर जाएं और वहां शनि देव की पूजा करें। इससे पुण्य प्राप्त होता है। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या चल रही उन्हें इस दिन शनिदेव की पूजा से लाभ मिलता है।*


*सरसों के तेल से होगी शनिदेव की पूजाः-*

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*इस दिन शनिदेव के पूजन में सरसों के तेल का उपयोग करें तथा काले उड़द की बनी हुई इमरती का भोग लगाएं। इससे जातकों की राशि पर चल रही शनि की महादशा साढ़े साती और ढैया से मुक्ति मिलती है।*


*शनिश्चरी अमावस्या के उपाय जानें रिसर्च एस्ट्रोलॉजर पवन कुमार वर्मा लुधियाना पंजाब जी से....*

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*1- स्कंद पुराण के अनुसार, शनिश्चरी अमावस्या के दिन माही नदी में स्नान करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष की पीड़ा से राहत मिलती है. सभी दुख दूर होते हैं।*


*2- शनिश्चरी अमावस्या पर शनि देव की विधिपूर्वक पूजा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. पूजा के समय नीले फूल, काला तिल, सरसों का तेल आदि श्रद्धापूर्वक अर्पित करना चाहिए. शनि कृपा से कार्यों में सफलता मिलेगी, कष्ट और पाप दूर ​होंगे।*


*3- शनिश्चरी अमावस्या के दिन आप किसी भी जरुरतमंद की मदद करें. उसे भोजन कराएं. उसे वस्त्र, जूते, चप्पल आदि दें। गरीबों की मदद करने वालों पर भी शनि देव प्रसन्न रहते हैं।*


*4- शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर आप किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली को​ सिंदूर का चोला चढाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें. आपको शनि पीड़ा से राहत मिलेगी।*


*हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने की परंपरा रही है। अमावस्या के अवसर पर पितृदोष से मुक्ति पाने का भी अच्छा समय होता है।*


*|| न्यायाधीश शनिदेव की जय हो ||*

             🙏🙏

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Saturday, 2 April 2022

नव वर्ष संवत 2079

 भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत् 2079

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विक्रम संवत 2079 शनिवार से शुरू हो रहा है और इसके राजा शनि होंगे। इस वर्ष का मंत्री मण्डल के पद इस प्रकार है। राजा-शनि, मंत्री गुरु ,सस्येश-सूर्य,दुर्गेश-बुध,धनेश-शनि, रसेश मंगल, धान्येश शुक्र, नीरसेशशनि,फलेश-बुध,मेघेश-बुध  होंगे। साथ ही संवत्सर का निवास कुम्हार का घर और समय का वाहन घोड़ा होगा।


भारतीय सांस्कृतिक गौरव की स्मृतियां समेटे हुए अपना नववर्ष युगाब्द 5124 विक्रम संवत 2079 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तदानुसार शनिवार 2 अप्रैल 2022 को प्रारंभ हो रहा है।


भारतीय नया साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 

     से प्रारम्भ होता है, क्यों कि?


1- लगभग  इसी तिथि को ब्रम्हाजी ने 

            श्रष्टि की रचना की थी।


2. पृथ्वी की रचना के कारण यह

      दिन भारतमाता का जन्मदिन है।


3. प्रकृति अपने पुराने आवरण को बदलती है 

     अर्थात नये फूल-पत्ते आते है।


4. भगवान रामचन्द्र जी का राज्याभिषेक

              इसी दिन हुआ था।


5. महाराज युधिष्ठर का राजतिलक लगभग 

       ‌5 हजार वर्ष पूर्व इसी दिन हुआ था।


6. महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रम सम्मत्

            इसी दिन हुआ।


7. नववर्ष के रूप में नवरात्रि का महान पर्व 

     इसी दिन से आरम्भ होता है और नौ दिन तक चलता है।


8. देव भगवान झूलेलाल का जन्मदिवस है।


शास्त्रों के अनुसार सभी चारों युगों में सबसे पहले सतयुग का प्रारम्भ इसी तिथि यानी चैत्र प्रतिपदा से हुआ था। यह तिथि सृष्टि के कालचक्र प्रारंभ और पहला दिन भी माना जाता है।


इसी के साथ ये भी मान्यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर भगवान राम ने वानरराज बाली का वध करके वहां  की प्रजा को मुक्ति दिलाई। जिसकी खुशी में प्रजा ने घर-घर में उत्सव मनाकर ध्वज फहराए थे।


आप सभी को मेरी ओर मेरे परिवार की तरफ से

  भारतीय नववर्ष की अनंत शुभकामनाएं।

              ✍☘💕

Tuesday, 1 March 2022

शिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

 *चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो*

*जटाधारी कण्ठे भुजंगपतिहारी पशुपतिः।*


*कपाली भूतेशो भजति*

*भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम्॥*


*जो चिता की भस्‍म रमाए हैं,विष खाते हैं, दिशाएँ ही जिनके वस्त्र हैं, जटा-जूट बांधे हैं, गले में सर्पमाल पहने हैं, हाथ में खप्‍पर लिए हैं, पशुपति और भूतों के स्‍वामी हैं, ऐसे शिवजी ने भी एक मात्र जगदीश्‍वर की पदवी पाई है, वह हे भवानी! तुम्‍हारे साथ विवाह होने का ही फल है।*


 *||शिवरात्री विशेष मे- ||*

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*राशि के अनुंसार महाशिवरात्री के दिन काैन से मंत्र के जाप करने से  शुभ फल-*



*मेष-ॐ सोमेश्वराय नम:*

*वृषभ-ॐ मल्लीकार्जुनाय*


*मिथुन-ॐ महाकालेश्वर नमः*

*कर्क-ॐ ॐकारेश्वराय नमः*


*सिंह-ॐ वैजनाथाय नमः*

*कन्या-ॐ भिमाशंकराय नमः*


*तुला-ॐ रामेश्वराय नमः*

*वृष्चिक-ॐ नागेश्वराय नमः*


*धनु-ॐ विस्वेश्वराय नमः*

*मकर-ॐ त्रम्बकेश्वराय नमः*


*कुंभ-ॐ केदारेश्वराय नमः*

*मीन-ऊँ धृष्मेश्वराय नमः*

 

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Saturday, 5 February 2022

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

 बसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें, फिर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित कर सफेद चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करने के बाद आरती उतारें । दूध, दही, घी, शकर,शहद और तुलसी मिलाकर पंचामृत का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाने के बाद इस मंत्र का जप 108 बार करें ।

मंत्र-

।। ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: ।।


 


इस दिन इन उपायों को जरूर करें-


1- जिन बच्चों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर और पढ़ाई में मन ना लगे तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को 5 हरे फलों को भेट करने के बाद 11फल गरीबों को दान कर दें ।

2- इस दिन पढ़ाई करने के स्थान पर पीले रंग के पर्दे या चित्र रखे । पढ़ाई में तेज मन लगने लगेगा ।

3- मां सरस्वती का चित्र अपने अध्ययन कक्ष या टेबल पर अवश्य रखें ।


4- अपनी टेबल पर क्रिस्टल या स्फटिक का ग्लोब रखें और उसे पढ़ाई करते समय बीच बीच में दो, तीन बार जरूर घुमाएं । ऐसा करने से एकाग्रता बढ़ेगी ।


5- अगर संगीत के क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं, तो मां सरस्वती के इस मंत्र- ‘ह्रीं वाग्देव्यै ह्रीं ह्रीं’ का रोज 108 बार जप जरूर करें, एवं शहद का भोग लगा कर उसे प्रसाद के रूप में बांट दे ।


6- अगर पति-पत्नी के संबंधों में विवादों, न्यायिक मामलें, या फिर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो बसंत पंचमी के दिन ‘अर्गला स्तोत्र’ और ‘कीलक स्तोत्र’ का पाठ करें ।

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